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बिहारी समाज

पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री के बाद जिले बदली तस्वीर, 100 से घटकर 4 से 6 तक सिमटी है रजिस्ट्री

Swatva
Last updated: September 8, 2026 2:27 pm
By Swatva 5 Views
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नवादा : जिले में जमीन की रजिस्ट्री को पेपरलेस किये जाने के करीब 20 से 25 दिन बाद निबंधन कार्यालय की तस्वीर बदली-बदली नजर सी दिखाई दे रही है। जिस निबंधन कार्यालय में कुछ दिन पहले तक जमीन की खरीद-बिक्री कराने वालों की भीड़ लगी रहती थी और प्रतीक्षालय में बैठने तक की जगह नहीं मिलती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन निबंधन की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गयी है।

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स्थिति यह है कि ऑफलाइन व्यवस्था में जहां एक दिन में करीब 100 जमीन की रजिस्ट्री होती थी, वहीं अब कई दिनों में यह संख्या 4 से 6 तक सिमट जा रही है। निबंधन कार्यालय में कुछ इसी प्रकार की स्थिति देखने को मिली। 7 सितंबर को कुल छह सेल का निबंधन किया गया। इससे निबंधन विभाग के राजस्व पर सीधा असर पड़ा है। विभागीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऑफलाइन व्यवस्था की तुलना में राजस्व में करीब 80 से 90 प्रतिशत तक की कमी आयी है।

पेपरलेस रजिस्ट्री लागू होने के बाद निबंधन कार्यालय में जमीन खरीदने-बेचने वाले लोगों की संख्या काफी कम हो गयी है। कभी लोगों से भरा रहने वाला प्रतीक्षालय अब अधिकांश समय खाली नजर आता है। जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोग भी पहले की तरह बड़ी संख्या में कार्यालय नहीं पहुंच रहे हैं इससे कार्यालय के आसपास का पूरा माहौल बदल गया है। निबंधन कार्यालय के आसपास संचालित होटल, चाय-नाश्ता और अन्य छोटे कारोबार पर इसका असर देखने को मिल रहा है। जमीन की रजिस्ट्री के लिए आने वाले लोगों और उनके साथ आने वाले परिजनों के कारण इन दुकानों और होटलों में दिनभर चहल-पहल रहती थी। रजिस्ट्री की संख्या घटने से इन कारोबारियों की आमदनी प्रभावित होने लगी है।

पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था को लेकर निबंधन वसीका नवीसों में नाराजगी है। विरोध में वसीका नवीस हड़ताल पर चले गये हैं। उनका कहना है कि नयी ऑनलाइन व्यवस्था में कई तरह की तकनीकी और प्रक्रियागत परेशानियां सामने आ रही हैं जिसके कारण आम लोगों को जमीन की रजिस्ट्री कराने में कठिनाई हो रही है।

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निबंधन पदाधिकारी अजय कुमार सिंह ने बताया कि ऑफलाइन व्यवस्था की तुलना में पेपरलेस ऑनलाइन रजिस्ट्री में जमीन निबंधन की संख्या में कमी आयी है। उन्होंने बताया कि 7 सितंबर को मात्र छह जमीन की बिक्री का निबंधन किया गया। नयी व्यवस्था में पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण पहले की अपेक्षा रजिस्ट्री की काफी संख्या कम हुई है।

पेपरलेस रजिस्ट्री के लिए खरीदार और विक्रेता को आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होते हैं। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आइडी जैसे पहचान पत्र शामिल हैं। जमीन से संबंधित खेसरा नंबर, खतौनी, अद्यतन लगान रसीद और पुराने मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज भी जरूरी होते हैं। दो गवाहों के पहचान पत्र और विवरण भी देना होता है। ऑनलाइन प्रक्रिया में पहले संबंधित निबंधन पोर्टल पर पंजीकरण किया जाता है इसके बाद विक्रेता और खरीदार की पूरी जानकारी तथा जमीन का क्षेत्रफल, प्लॉट नंबर, खेसरा नंबर और बाजार मूल्य दर्ज किया जाता है। जमीन के मूल्य के आधार पर स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क की गणना कर ऑनलाइन भुगतान किया जाता है।

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शुल्क भुगतान के बाद खरीदार अपनी सुविधा के अनुसार निबंधन कार्यालय में आने के लिए तारीख और समय का अपॉइंटमेंट बुक करता है। निर्धारित तिथि पर खरीदार, विक्रेता और गवाह मूल दस्तावेजों के साथ कार्यालय पहुंचते हैं। कार्यालय में दस्तावेजों का सत्यापन, फोटो, बायोमेट्रिक और डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रजिस्ट्री को अंतिम रूप दिया जाता है।

पेपरलेस व्यवस्था का उद्देश्य जमीन निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाना है। हालांकि, शुरुआती दौर में रजिस्ट्री की घटती संख्या और इससे जुड़े कारोबार पर पड़ रहे असर ने नयी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ऑनलाइन प्रक्रिया के प्रति लोगों की समझ और स्वीकार्यता बढ़ने के बाद निबंधन की संख्या में कितना सुधार आता है।

भईया जी की रिपोर्ट

TAGGED: nawada khabar, Nawada news, nawada updates, नवादा, पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री
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