नवादा : जिले के धमौल थाना क्षेत्र के चर्चित चौकीदार जितेंद्र पासवान हत्याकांड में व्यवहार न्यायालय ने नामजद आरोपित निरंजन कुमार उर्फ निरंजन यादव की दायर नियमित जमानत याचिका ख़ारिज कर दी। न्यायालय ने मामले की गंभीरता,उपलब्ध साक्ष्यों व अपराध की जघन्यता को देखते हुए आरोपित को नियमित जमानत देना ही न्यायोचित नहीं माना। घटित घटना धमौल थाना कांड संख्या 63/26 से संबंधित है।विदित हो कि 10 मई 2026 की रात धमौल थाना से ड्यूटी से लौट रहे चौकीदार जितेंद्र पासवान को चाकू से गोद-गोदकर नृशंस हत्या शराब माफिया द्वारा कर दी गई थी। न्यायालय ने केस की डायरी और साक्ष्यों के आधार पर दायर जमानत याचिका को निरस्त कर दी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 10 मई 2026 की रात ड्यूटी समाप्त कर अपने घर लौट रहे चौकीदार जितेंद्र पासवान को घेरकर मुखबिरी के संदेह में आरोपित शराब माफियाओं ने जानलेवा जबर्दस्त हमला किया था। निर्दयी हमलावरों ने धारदार चाकू से उसके पेट पर ताबड़तोड़ बार कर गंभीर रूप से गोद गोद कर घायल करके अधमरा कर दिया था। ईलाज के दौरान पीएमसीएच पटना में जितेंद्र की मौत हो गई थी। थाने के द्वार के पास जितेंद्र पासवान पर हमले को बड़े ही निडरता से अंजाम दिया गया था।
जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने केस डायरी में उपलब्ध गवाहों के बयान,चिकित्सीय साक्ष्य व घटना की परिस्थितियों एवं हथियार की बरामदगी और अबतक अनुसंधान के दौरान सामने आए तथ्यों का गहन अवलोकन किया।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऑन ड्यूटी वर्दीधारी चौकीदार की निर्मम हत्या जैसी क्रूर गंभीर अपराध में इस स्तर पर आरोपी को राहत देना कतई उचित नहीं होगा, जिसके बाद याचिका को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से आरोपी सलाखों के पीछे है।
गौरतलब है कि उक्त घटना के बाद पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलीजेंस के आधार पर करवाईं करते हुए मुख्य आरोपी रामपत यादव उर्फ गौतम कुमार को शेखपुरा जिले के चेवाड़ा से पुलिस द्वारा दबोचा लिया गया था। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि पुराने विवाद में रेकी कर हत्या करने की बात स्वीकार की थी। उक्त मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अबतक मनोहर पासवान उर्फ नागा और तीन विधि-विरुद्ध बालकों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। न्यायालय की इस सख्त कड़े रुख से पीड़ित परिवार को थोड़ा न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। पीड़ित परिवार के लिए अब तो न्याय व न्यायालय ही एक मात्र बचा रास्ता तथा सहारा है।
भईया जी की रिपोर्ट