नवादा : जिले के सदर प्रखंड के क्षेत्र के घोसतावां के महादलित टोला जगतपुर दलदलहा के लगभग 20 भूमिहीन दलित परिवारों ने पिछले तीन दशकों के पूर्व से ही बिहार सरकार की गैरमजरूआ जमीन, प्लॉट नंबर 4586 पर बसे हैं। झोपड़ी- खोपड़ी देकर किसी तरह भरण-पोषण एवं गरीब गुजारा करते आ रहे हैं। वर्षों पूर्व यानी वर्ष 21.10.1991 को उक्त गैरमजरूआ जमीन पर बसे भूमिहीन महादलितों द्वारा वासगीत पर्चा के लिए आवेदन पत्र सदर अंचल अधिकारी को दिया था।
सीओ ने क्षेत्र के हल्का कर्मचारी को जमीन जांच कर रिपोर्ट मांगी थी।लेकिन,बेहद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आजतक वर्षों से बसे दलितों को वासगीत पर्चा निर्गत नहीं किया गया । इसके चलते यहां के मेहनतकश महादलित सरकार प्रदत सभी प्रकार के सुविधाओं को प्राप्त करने से पूर्णतः बंचित हैं। विडंबना है कि एक तरफ सरकार वासगीत के लिए 3 से 5 डिसमिल जमीन देने की बात करती रही है और दूसरी ओर तीन दशकों पूर्व से बिहार सरकार के गैरमजरूआ जमीन पर बसे भूमिहीन मजदूरों को आजादी के 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी आजतक वासगीत पर्चा के लिए लालायित व मुंहताज हैं।
फलत: भूमिहीन दलितों में भारी नफरत और आक्रोश व्याप्त है,जो किसी भी समय विस्फोट कर कभी भी यहां आंदोलनात्मक रूप में तब्दील हो सकता है। इस बावत भूमिहीन महादलितों ने डीएम के जनता दरबार में घोसतावां मौजा के जगतपुर दलदलहा गांव के 3 दशक पूर्व से बिहार सरकार की गैरमजरूआ जमीन पर बसे महादलितों ने वासगीत पर्चा के लिए आवेदन पत्र समर्पित किया है। कुल 20 महादलित आवेदकों द्वारा हस्ताक्षर एवं अंगूठा निशान युक्त आवेदन डीएम को दिया।
भईया जी की रिपोर्ट
