नवादा : सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन “लेट्स इंस्पायर बिहार (LIB)” द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी यादव द्वारा संगठन एवं इसके मुख्य संरक्षक श्री विकास वैभव, आईपीएस के संबंध में लगाए गए आरोपों का तथ्यात्मक एवं स्पष्ट रूप से खंडन किया है। प्रेस वार्ता में सुमन कुमार, (समन्वयक लेट्स इंस्पायर बिहार)प्रोफेसर विजय कुमार, मंडल जी, शशांक कुमार, विश्वजीत कुमार( समन्वयक लेट्स इंस्पायर सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
प्रेस वार्ता में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि लेट्स इंस्पायर बिहार एक पूर्णतः गैर-राजनीतिक सामाजिक अभियान है, जिसका उद्देश्य बिहार के युवाओं को प्रेरित करना, समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना तथा शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक चेतना के माध्यम से राज्य के समग्र विकास में योगदान देना है। आज इस अभियान से चार लाख से अधिक युवा जुड़े हुए हैं तथा बिहार के विभिन्न जिलों में अनेक सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
वक्ताओं ने कहा कि किसी सामाजिक मंच के कार्यक्रमों में विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों एवं समाजसेवियों की उपस्थिति लोकतांत्रिक समाज में एक सामान्य बात है। किसी कार्यक्रम में किसी जनप्रतिनिधि की उपस्थिति अथवा उनके साथ सार्वजनिक रूप से ली गई तस्वीरों के आधार पर किसी प्रकार के व्यक्तिगत संबंध, संरक्षण अथवा आर्थिक सहयोग का आरोप लगाना न केवल तथ्यहीन है, बल्कि सार्वजनिक विमर्श की गरिमा के भी प्रतिकूल है।
प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया गया कि लेट्स इंस्पायर बिहार का संचालन किसी राजनीतिक दल, जनप्रतिनिधि अथवा बाहरी प्रायोजक के आर्थिक सहयोग से नहीं होता। संगठन के सभी कार्यक्रम इसके स्वयंसेवकों एवं अभियान से जुड़े सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से संचालित किए जाते हैं। वक्ताओं ने हाल में रोहतास जिले के डेहरी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले की जांच बिहार पुलिस द्वारा विधि-सम्मत तरीके से की जा रही है। प्रारंभिक अनुसंधान के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्हें पुलिस अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से साझा किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अनुसंधान पूर्ण होने के बाद ही सामने आएगा।
वक्ताओं ने कहा कि ऐसी स्थिति में जांच के दौरान बिना किसी ठोस साक्ष्य के किसी अधिकारी की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाना अथवा किसी सामाजिक संगठन को विवाद में घसीटना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे चल रहे अनुसंधान को प्रभावित करने के प्रयास की आशंका उत्पन्न होती है। न्यायालयों द्वारा समय-समय पर यह स्पष्ट किया गया है कि लंबित अनुसंधान में अनावश्यक सार्वजनिक हस्तक्षेप से बचना चाहिए, ताकि जांच निष्पक्ष एवं स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सके।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि श्री विकास वैभव, आईपीएस ने अपने पूरे सेवाकाल में ईमानदारी, निष्पक्षता एवं कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों पर उनकी सेवाओं को व्यापक सराहना मिली है। किसी अधिकारी के पेशेवर दायित्वों को उनके सामाजिक कार्यों अथवा पारिवारिक संबंधों से जोड़कर उनकी निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त करना उचित नहीं है।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि श्री विकास वैभव, आईपीएस लेट्स इंस्पायर बिहार में किसी प्रकार का आधिकारिक अथवा प्रशासनिक पद धारण नहीं करते हैं। वे इस सामाजिक अभियान के प्रेरणास्रोत एवं मुख्य संरक्षक के रूप में जुड़े हुए हैं और अपने अवकाश के समय समाजहित में अपनी सहभागिता देते हैं।
प्रेस वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी सामाजिक अभियान से जुड़े व्यक्ति की सार्वजनिक जीवन में विभिन्न लोगों से मुलाकात अथवा किसी कार्यक्रम में सहभागिता को राजनीतिक संबंध या आर्थिक लेन-देन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। लोकतांत्रिक एवं सामाजिक जीवन में विभिन्न विचारधाराओं और क्षेत्रों से जुड़े लोगों का एक मंच पर आना स्वाभाविक है।
नेता प्रतिपक्ष से तथ्यात्मक उत्तर की मांग
प्रेस वार्ता के माध्यम से लेट्स इंस्पायर बिहार ने नेता प्रतिपक्ष श्री तेजस्वी यादव से उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में निम्नलिखित प्रश्नों का तथ्यात्मक उत्तर देने का आग्रह किया—
उन्होंने किस आधार पर यह आरोप लगाया कि किसी विधायक द्वारा लेट्स इंस्पायर बिहार को वित्तीय सहयोग दिया जाता है?
क्या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में किसी जनप्रतिनिधि की उपस्थिति अथवा उनके साथ तस्वीर होना आर्थिक सहयोग या व्यक्तिगत संरक्षण का प्रमाण माना जा सकता है?
क्या उनके पास ऐसा कोई बैंकिंग लेन-देन, दस्तावेज अथवा अन्य ठोस साक्ष्य है, जिससे उनके आरोपों की पुष्टि होती हो?
जब संबंधित प्राथमिकी में उक्त विधायक का नाम नहीं है और पुलिस की जांच अभी जारी है, तो इस प्रकार के सार्वजनिक बयान देने का औचित्य क्या है?
क्या इस प्रकार के आरोप चल रहे अनुसंधान को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में नहीं देखे जाने चाहिए?
वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कोई गंभीर आरोप लगाया जाता है तो उसके समर्थन में ठोस तथ्य एवं प्रमाण भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए। केवल तस्वीरों, मुलाकातों अथवा सार्वजनिक कार्यक्रमों में उपस्थिति के आधार पर आर्थिक संबंध या संरक्षण का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। इस दौरान संत शरण शर्मा, केशव कुमार, गिरिजेश कुमार, मनोज कुमार, प्रेम सिन्हा एवं श्रीकांत कुमार। ( सदस्य लेट्स इंस्पायर मौजूद रहे।
भईया जी की रिपोर्ट