नवादा : जिले में अपराध अनुसंधान और थानों की कार्यप्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट सामने आई है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जुलाई माह में जिले के विभिन्न थानों में कुल 34 मामलों का अंतिम प्रतिवेदन (फाइनल रिपोर्ट) दाखिल कर उन्हें निष्पादित किया गया. इन मामलों में 23 केस ‘सत्य सूत्रहीन’ (ट्रू अनट्रेस्ड) और 11 मामले ‘तथ्य की भूल’ (मिस्टेक ऑफ फैक्ट) की श्रेणी में पाए गए। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि संपत्ति संबंधी अपराधों में सुराग जुटाने की चुनौती अब भी बनी हुई है, जबकि कई मामलों में सामाजिक दबाव के कारण दर्ज प्राथमिकी जांच के दौरान गलतफहमी साबित हुई।
आंतरिक आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 23 मामले चोरी और लूट से जुड़े थे। इनमें नवादा नगर, सिरदला, रजौली, नेमदारगंज और हिसुआ थाना क्षेत्र के कई मामले शामिल हैं। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि घटनाएं वास्तविक थीं, लेकिन अपराधियों तक पहुंचने के लिए कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। ऐसे मामलों को ‘सत्य सूत्रहीन’ मानते हुए अंतिम प्रतिवेदन के साथ बंद कर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार नगर थाना कांड संख्या 1297/2025 में चंदन कुमार की मोटरसाइकिल दो अज्ञात अपराधियों द्वारा लूट ली गई थी। जांच के बावजूद कोई सुराग नहीं मिलने पर मामले को ‘सत्य सूत्रहीन’ मानकर बंद किया गया। इसी तरह नेमदारगंज थाना कांड संख्या 123/2026 में धारा 303(2) बीएनएस के तहत दर्ज चोरी के मामले और नगर थाना कांड संख्या 1376/2023 में दर्ज चोरी के पुराने मामले को भी पर्याप्त साक्ष्य और सुराग के अभाव में निष्पादित कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार 11 मामले ऐसे थे, जिनमें प्रारंभिक तौर पर अपहरण या गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। विस्तृत अनुसंधान के बाद यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश मामले पारिवारिक विवाद, आपसी सहमति या गलतफहमी के कारण उत्पन्न हुए थे। ऐसे मामलों को ‘तथ्य की भूल’ की श्रेणी में रखते हुए अंतिम रिपोर्ट के साथ बंद किया गया।
नगर थाना कांड संख्या 1183/2021, नेमदारगंज थाना कांड संख्या 87/2026 तथा नगर थाना कांड संख्या 1441/2023 जैसे मामलों में अपहरण की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। लेकिन अनुसंधान के दौरान आरोपों की पुष्टि नहीं हुई और मामलों को ‘तथ्य की भूल’ मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई। आंतरिक समीक्षा के अनुसार जुलाई माह में कुल 34 मामलों का निष्पादन किया गया, इनमें 23 मामले ‘सत्य सूत्रहीन’ और 11 मामले ‘तथ्य की भूल’ के पाए गए। इन मामलों का संबंध मुख्य रूप से नवादा नगर, सिरदला, नेमदारगंज, रजौली और हिसुआ थाना क्षेत्रों से रहा।
समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि शहर और प्रमुख थाना क्षेत्रों में तकनीकी सर्विलांस, डिजिटल निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जाए, ताकि चोरी और संपत्ति संबंधी मामलों में ‘नो क्लू’ की स्थिति कम हो सके। अपहरण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रारंभिक स्तर पर काउंसलिंग और तथ्यों की त्वरित जांच की व्यवस्था मजबूत करने की भी आवश्यकता बताई गई है। अनुसंधान अधिकारियों पर बढ़ते कार्यभार को कम करने के लिए प्रशासनिक सुधार की जरूरत पर बल दिया गया है।
डीएसपी मुख्यालय पवन कुमार यादव ने कहा कि नाबालिगों की गुमशुदगी और अपहरण जैसी शिकायतों में कानून और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करनी होती है। कई मामलों में बाद की जांच में यह स्पष्ट होता है कि मामला गलतफहमी या पारिवारिक विवाद का था। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के बाद जो भी तथ्य सामने आते हैं, उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि संपत्ति संबंधी अपराधों में बेहतर परिणाम के लिए पुलिस लगातार अपने तकनीकी और सूचना तंत्र को मजबूत कर रही है।
व्यवहार न्यायालय के युवा अधिवक्ता गौतम सिंह गुलाब ने कहा कि जुलाई में बंद हुए 34 मामलों के आंकड़े बताते हैं कि पुलिस और न्यायिक व्यवस्था पर अनावश्यक मुकदमों का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि चोरी के मामलों में बेहतर खुफिया तंत्र विकसित करने की जरूरत है। वहीं अपहरण और गुमशुदगी जैसे मामलों में यदि थानों के स्तर पर प्रारंभिक काउंसलिंग और त्वरित तथ्यात्मक जांच की प्रभावी व्यवस्था हो, तो कई गलतफहमी वाले मामलों को एफआईआर दर्ज होने से पहले ही सुलझाया जा सकता है। इससे पुलिस और न्यायालय, दोनों का समय बचेगा।
भईया जी की रिपोर्ट