नवादा : जिले में इन दिनों जख्मी पैर का लेकिन इलाज सर का किये जाने का चलन अधिकारियों द्वारा जोर पकड़ता जा रहा है। ऐसे में भूमि विवाद कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। फिर नक्सलवाद को बढ़ावा मिलना तय माना जा रहा है। इस प्रकार के एक नहीं कई मामले हैं। ऐसा लाभ- शुभ के चक्कर में होने की चर्चा जोरों पर है।
ताज़ा मामला गोविंदपुर का है। सौंधी मांझी व प्रदीप मांझी को जिला प्रशासन ने वर्षों पूर्व खाता नंबर 45 व 46 के तहत प्रति एक एकड़ 80 डीसमिल भूमि उपलब्ध कराया था। फिलहाल प्रदीप मांझी अपनी भूमि के बजाय सौंधी मांझी की भूमि पर जबरन कब्जा कर मकान निर्माण कर रह रहा है। हालात यह है कि सौंधी मांझी के पुत्रों द्वारा भवन निर्माण का जबरन विरोध प्रदीप मांझी द्वारा किया जा रहा है। इस बात निवर्तमान रजौली एसडीएम द्वारा पूर्व में लागू निषेधाज्ञा पर अपना निर्णय सौंधी मांझी के पक्ष में देते हुए भवन निर्माण का आदेश निर्गत किया था।
अधिकारियों की मनमानी
हालात यह है कि सौंधी मांझी के पुत्रों ने जब भवन निर्माण कार्य आरंभ किया पुनः अधिकारियों ने निषेधाज्ञा लागू कर भवन निर्माण पर रोक लगा दिया। आश्चर्य यह कि जिस पर रोक लगाई गई है वह सौदी के पुत्रों की भूमि है ही नहीं वह भूमि प्रदीप मांझी की है लेकिन रोका जा रहा है सौदी की भूमि पर। ऐसा हम नहीं उपलब्ध दस्तावेज व निषेधाज्ञा के तहत जारी नोटिस कह रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह कि जिस भूमि पर सौदी के पुत्रों का दावा है वह निर्विवाद है तो फिर अधिकारियों द्वारा भवन निर्माण पर किस नियम के तहत रोक लगाया जा रहा है? जाहिर यह नियम के विरुद्ध अधिकारियों द्वारा लाभ- शुभ के चक्कर में मनमानी की जा रही है। ऐसा पहला मामला है ऐसी भी बात नहीं है। इस प्रकार के कई ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं जिसमें अधिकारियों की मनमानी चल रही है। इस प्रकार की मनमानी पर समाहर्ता को संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई किये जाने की आवश्यकता है। अब सबसे बड़ा सवाल क्या ऐसा हो सकेगा?
भईया जी की रिपोर्ट