नवादा : जिले में इस वक्त किसानों की चिंता सातवें आसमान पर पहुंचाने वाली खबर सामने आ रही है। आसमान में मॉनसून के बादलों की दस्तक के साथ ही पूरे जिले में धान की मुख्य पारंपरिक खेती की तैयारियां तेज हो गई हैं। खेतों को तैयार कर चुके किसानों ने धान की नर्सरी (बिचड़ा) डालने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन सबसे बड़ी प्रशासनिक लापरवाही यह है कि पूरे जिले में सरकारी स्तर पर धान का बीज अब तक उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। बीज की घोर किल्लत के कारण क्षेत्र के हजारों किसान गहरी चिंता और घबराहट में जी रहे हैं।
दिन भर कृषि भवन का चक्कर काट रहे हैं किसान, नक्षत्र बीतने से बढ़ रही है खेती की लागत
जिले के विभिन्न गांवों के जागरूक किसानों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए सरकारी दावों की पोल खोल दी है। बुजुर्ग किसानों के अनुसार, नक्षत्र और कृषि पंचांग के हिसाब से धान की नर्सरी लगाने का सबसे उपयुक्त और स्वर्णिम समय शुरू हो चुका है। खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाने वाला ‘मृगशिरा नक्षत्र’ भी अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। 22 जून को आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश होना है। बावजूद प्रखंड के प्रगतिशील किसान वीरेंद्र पासवान, राजेंद्र प्रसाद सिंह, महेंद्र राम, शंभू चौधरी एवं अशोक कुमार ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से चिलचिलाती धूप में कृषि भवन के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा उन्हें हर बार खाली हाथ वापस लौटा दिया जा रहा है।
सरकारी गोदामों के साथ-साथ खुले बाजार में भी ब्लैकआउट, निजी दुकानदार उठा रहे हैं मजबूरी का फायदा
किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी डालने की जो सही समय सीमा है, वह हाथ से रेत की तरह लगातार निकलती जा रही है। सबसे बड़ी आफत यह है कि सरकारी वितरण केंद्रों पर तो ताले लटके ही हैं, साथ ही स्थानीय खुले बाजारों और प्राइवेट दुकानों में भी धान बीज की कोई अच्छी कंपनी का प्रमाणित बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। बाजार में जो थोड़ा-बहुत बीज बचा भी है, उसे निजी दुकानदार मनमाने और ऊंचे दामों पर बेचकर किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो से तीन दिनों के भीतर उन्हें उन्नत बीज नहीं मिला, तो बिचड़ा तैयार होने में देरी होगी, जिसका सीधा नकारात्मक असर धान का आच्छादन और उत्पादन पर पड़ेगा। बहरहाल, सरकारी फाइलों और वादों की सुस्त रफ्तार के बीच जिले के किसान हर सुबह उम्मीद भरी निगाहों से कृषि दफ्तर की ओर ताक रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन समय रहते गहरी नींद से जागता है या जिले के मुख्य कृषि क्षेत्र के किसानों को इस साल सूखे की कगार पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
भईया जी की रिपोर्ट