नवादा : जिले में उदासीन संप्रदाय की प्राचीन एवं पूज्यनीय संस्था उदासीन संगत रजौली प्रखंड क्षेत्र के अमावा के संबंध में हाल के दिनों में कुछ व्यक्तियों द्वारा भ्रामक, असत्य एवं दुष्प्रचारपूर्ण बातें फैलाई जा रही हैं, जिनका सत्य से कोई संबंध नहीं है। इस संबंध में स्पष्ट किया जाता है कि उदासीन संगत अमावा में महंती को लेकर कोई विवाद नहीं है तथा श्री महंत पद को लेकर किसी प्रकार का कोई वैधानिक संशय नहीं है।
बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद, पटना द्वारा बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 34 के अंतर्गत श्री महंत दयानंद मुनि जी को विधिवत निर्वाचारी महंत नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वही परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त एकमात्र वैध श्री महंत हैं। अतः किसी अन्य व्यक्ति अथवा तथाकथित समिति द्वारा स्वयं को महंत घोषित करना विधि एवं परंपरा—दोनों के विरुद्ध है। श्री महंत दयानंद मुनि ने स्पष्ट कहा है कि महंत शत्रुघ्न दास जी के पश्चात संगत की बहुमूल्य चल-अचल संपत्तियों का विधिवत लेखा-जोखा परिषद को प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि पूर्व के महंत नियमित रूप से अपना रोकड़-बही एवं संपत्ति विवरण धार्मिक न्यास परिषद को जमा करते रहे हैं।
वर्ष 1992 से 2025 तक कुछ लोगों द्वारा “महंत बनाओ—महंत हटाओ” की राजनीति के कारण आश्रम की व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई, जिसके परिणामस्वरूप तीन संत-महंतों की हत्या तक हो चुकी है तथा कई बार हिंसक घटनाएँ, गोलीबारी एवं उपद्रव भी हुए हैं।यह भी गंभीर चिंता का विषय है कि संगत की लगभग 70 एकड़ बहुमूल्य धार्मिक संपत्ति, कृषि उपज, दान राशि, निर्माण सहयोग राशि एवं अन्य संसाधनों का समुचित विवरण आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। पूर्व में तथाकथित “प्रबंधन समिति” द्वारा आश्रम संचालन का दावा किया गया, जबकि उक्त समिति किसी भी सोसाइटी एक्ट अथवा ट्रस्ट एक्ट के अंतर्गत पंजीकृत नहीं थी।
उदासीन संप्रदाय में महंत नियुक्ति की परंपरा केवल गुरु-शिष्य परंपरा एवं संप्रदाय की मान्य नियमावली के अनुसार होती है। किसी ग्रामीण समिति, निजी समूह अथवा बाहरी व्यक्ति को महंत नियुक्त करने या हटाने का कोई अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल संप्रदाय एवं परंपरा के अधिकृत संतों को प्राप्त है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 द्वारा संरक्षित धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ असामाजिक तत्व निजी स्वार्थवश ग्रामीणों को भ्रमित कर रहे हैं, धन देकर भीड़ इकट्ठी कर रहे हैं, तथा सोशल मीडिया पर श्री महंत दयानंद मुनि जी के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर दुष्प्रचार फैला रहे हैं।
इससे न केवल धार्मिक वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि साधु-संतों की गरिमा भी आहत हो रही है। हाल ही में गुरु-पितरों के उद्धार हेतु आयोजित पिंडदान, श्राद्ध, पूजा-पाठ एवं भंडारे जैसे पवित्र धार्मिक कार्यक्रमों में भी कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा बाधा उत्पन्न की गई, साधु-संतों को प्रताड़ित किया गया तथा आश्रम में लूटपाट एवं सरकारी कार्यों में बाधा डाली गई। इस संबंध में प्रशासन को पूर्व सूचना दी गई थी कि आश्रम में कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है, किंतु अब तक दोषियों की गिरफ्तारी एवं दंडात्मक कार्रवाई न होना अत्यंत चिंता एवं पीड़ा का विषय है।
प्रशासन से प्रमुख मांगें
1. उदासीन संगत अमावा की संपूर्ण चल-अचल संपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. पूर्व वर्षों के वित्तीय लेखा-जोखा की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
3. आश्रम में उपद्रव, लूटपाट एवं सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले अपराधियों कहीं शीघ्र गिरफ्तारी हो।
4. श्री महंत एवं आश्रम की सुरक्षा हेतु स्थायी प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित की जाए।
5. फर्जी प्रचार एवं धार्मिक भावनाएँ भड़काने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उदासीन संगत अमावा किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि भगत भगवान बाबा एवं उदासीन गुरु-शिष्य परंपरा की पवित्र धरोहर है। इसकी रक्षा करना हम सभी का धार्मिक एवं नैतिक दायित्व है। बता दें अमांवा संगत महंत विवाद में हाल ही हुई अप्रिय घटना के बाद दोनों पक्षों से थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। ऐसे में इस बयान का अति महत्वपूर्ण भूमिका है।
भईया जी की रिपोर्ट