पटना: जिलाधिकारी सह अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस.एम. (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में मंगलवार को समाहरणालय सभागार में जिला गंगा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंगा नदी एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा सीवरेज प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी, जिला परियोजना पदाधिकारी (नमामि गंगे), नगर निगम प्रतिनिधि, बुडको के अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। पूर्व में लिए गए निर्णयों की समीक्षा करते हुए उनके क्रियान्वयन की प्रगति का आकलन किया गया।
गंगा रिसर्च सेंटर हस्तांतरण का निर्णय
बैठक का एक प्रमुख निर्णय कलेक्ट्रेट घाट स्थित गंगा रिसर्च सेंटर सह म्यूजियम भवन को लेकर लिया गया। सर्वसम्मति से तय किया गया कि इस भवन को विधिवत रूप से जिला गंगा समिति, जिला प्रशासन पटना को हस्तांतरित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि परिसर की चहारदीवारी, हरित पट्टी, प्रकाश, पेयजल एवं शौचालय सहित आधारभूत सुविधाओं का विकास कराया जाएगा। साथ ही यहां जिला गंगा समिति का कार्यालय स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया।
सीवरेज और नालों पर सख्त निर्देश
बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि किसी भी स्थिति में अनुपचारित जल सीधे गंगा में न जाए। गंगा एवं सहायक नदियों में गिरने वाले सभी नालों की सूची तैयार कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जोड़ने का निर्देश बुडको और नगर निगम को दिया गया।दीघा स्थित एसटीपी के निर्माण कार्य को लगभग पूर्ण बताया गया, जिससे बड़े क्षेत्र के नालों का उपचार संभव होगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर नगर निगम को डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था मजबूत करने और गीले-सूखे कचरे के पृथक्करण को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। नदी तट क्षेत्रों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाने पर भी बल दिया गया।
नमामि गंगे के पांचों पिलरों की समीक्षा
बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के पांचों प्रमुख पिलर—निर्मल गंगा, अविरल गंगा, जन गंगा, ज्ञान गंगा एवं अर्थ गंगा—के तहत चल रहे कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
निर्मल गंगा: प्रदूषण नियंत्रण और सफाई व्यवस्था
अविरल गंगा: नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखना
जन गंगा: जन-जागरूकता और सहभागिता बढ़ाना
ज्ञान गंगा: शोध, मॉनिटरिंग और नवाचार
अर्थ गंगा: आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
जनभागीदारी पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा संरक्षण केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रम तेज करने के निर्देश दिए गए। बैठक के अंत में उम्मीद जताई गई कि लिए गए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन से गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता एवं संरक्षण में ठोस सुधार होगा और पटना एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरेगा।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट