नवादा : जी हां! व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओं की प्यास बुझाने के लिए कभी टेबल-टेबल आरओ का ठंडा पानी के साथ ग्लाश उपलब्ध रहता था। तब उन्हें किसी से पानी मांगने या फिर कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होती थी। यहां तक कि बार एसोसिएशन के आदेशपाल एक आबाज लगाते ही हाजिर होते थे। लेकिन तब की बात कुछ और थी, अब की कुछ और।
तब सेवा और सुरक्षा का वायदा था, लेकिन अब…..?
जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं व्यवहार न्यायालय अधिवक्ता संघ का। राज्य बार कौंसिल ने जब से तदर्थ कमिटी की नियुक्ति की तब से अधिवक्ताओं की परेशानियां बढ़ती जा रही है। राज्य बार कौंसिल के चुनाव कराने के आदेशों की बार बार धज्जियां उड़ाई जा रही है। ऐसा लगता है जैसे इन्हें मनमानी की छूट मिल गयी हो। फिलहाल जिला भयंकर लू की चपेट में है। सुबह होते ही गर्म हवा शरीर को झुलसा रही है।
ऐसे में हर किसी को शरीर को ठंडा करने के लिए पानी की आवश्यकता है। न्यायालय प्रातः कालीन है। सुबह जल्दी न्यायालय आने की विवशता है। जाहिर है अल्पाहार के बाद घर से न्यायालय आते आते पानी की तलब होती है, लेकिन यह क्या? टेबल पर तो पानी है ही नहीं। ऐसे में उन्हें प्यास बुझाने के लिए स्वयं चापाकल का सहारा लेने को विवश होना पड़ रहा है। जहां, तक आदेशपाल की बात है तो उनका तो कहीं आसपास पता तक नहीं चलता। ऐसे में सवाल पूछा जाने लगा आखिर ऐसा अबतक?
भईया जी की रिपोर्ट