नवादा : सदर अस्पताल में पड़ताल के दौरान यह देखा गया कि जिस वार्ड में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की ड्यूटी लगी थी, वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे। उनकी जगह एक अन्य व्यक्ति मरीजों को देखता हुआ नजर आया। मौके पर मौजूद मरीजों ने भी पुष्टि की कि डॉक्टर के नहीं रहने पर यही व्यक्ति इलाज करता है। एक मरीज ने बताया कि वह पैर में मोच की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचा था। पर्ची कटवाने के बाद उसे हड्डी विभाग में भेजा गया, लेकिन वहां डॉक्टर नहीं मिले। इसके बजाय एक अन्य व्यक्ति ने उसका इलाज किया और दवा से जुड़ी सलाह दी।
कैमरे पर सवाल, मौके से फरार
उस व्यक्ति से सवाल किया गया तो वह खुद को “ऑपरेटर” बताने लगा और इलाज करने की बात से इनकार करता रहा। हालांकि कैमरे में वह मरीजों को देखते हुए नजर आया। सवाल-जवाब के दौरान वह असहज दिखा और मौका मिलते ही वहां से निकल गया।
ड्यूटी पर थे डॉक्टर, नहीं थे मौजूद
जांच में यह भी सामने आया कि ऑर्थोपेडिक विभाग में डॉक्टर संतोष कुमार गौरव की ड्यूटी तय थी। बावजूद इसके वे मौके पर मौजूद नहीं थे। इससे यह सवाल उठता है कि ड्यूटी के दौरान डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों का इलाज कौन और कैसे कर रहा है?
सिविल सर्जन ने जताई अनभिज्ञता
इस बावत सिविल सर्जन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर भले देर से आते हों, लेकिन किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा इलाज करने की जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई का भरोसा जरूर दिया है।
अस्पताल प्रबंधन पर उठे कई सवाल
घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना किसी अधिकृत अनुमति के कोई बाहरी व्यक्ति अस्पताल में कैसे प्रवेश कर रहा है और मरीजों का इलाज कर रहा है।
मरीजों की सुरक्षा पर संकट
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला न केवल नवादा बल्कि पूरे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। बता दें, इस तरह की लापरवाही मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। बिना प्रशिक्षित या अधिकृत व्यक्ति द्वारा इलाज किया जाना गंभीर खतरे को जन्म दे सकता है। कुल मिलाकर, सदर अस्पताल का यह मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है, जहां सुधार की सख्त जरूरत है।
भईया जी की रिपोर्ट