नवादा : श्री पंचायती देवऋषि अखाड़ा (अखाड़ा परिषद से मान्यता प्राप्त) द्वारा महामंडलेश्वर महंत दयानंद मुनि जी महाराज को संगठन के तीन महत्वपूर्ण पद—संस्थापक, राष्ट्रीय सलाहकार एवं महामंडलेश्वर—की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस निर्णय के बाद संत समाज एवं अनुयायियों में हर्ष का माहौल है। अखाड़ा से जारी सूचना के अनुसार, उनकी नियुक्ति सदस्य संख्या BRSS/01/04/2026/00043 के अंतर्गत की गई है, जिसकी वैधता तीन वर्ष निर्धारित की गई है।
बताया गया कि महामंडलेश्वर दयानंद मुनि जी, महंत विवेक मुनि जी महाराज के शिष्य हैं तथा उनका स्थायी निवास उदासीन मठ संगत, फुलवारी (पटना) में है। वर्तमान में वे जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र उदासीन संगत अमावां के महंत के रूप में कार्यरत हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस पीठ के पीठाधीश्वर मुख्य पीठ बाबा भगत भगवान जी माने जाते हैं, जिनकी परंपरा को आगे बढ़ाने का दायित्व दयानंद मुनि जी निभा रहे हैं। अखाड़ा के प्रतिनिधि हर मनोक दास ने बताया कि दयानंद मुनि जी के आध्यात्मिक अनुभव, संगठन क्षमता और संत समाज में सक्रिय योगदान को देखते हुए उन्हें यह दायित्व सौंपा गया है।
कहते हैं महामंडलेश्वर दयानंद मुनि
इस अवसर पर महामंडलेश्वर महंत दयानंद मुनि जी महाराज ने अपना वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि “सदस्य से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन मैंने जिस निष्ठा से किया है, उससे कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी अब मेरे ऊपर है। संत समाज का जो विश्वास मुझे मिला है, उस पर खरा उतरना मेरा कर्तव्य है। मैं सदैव साधु-संतों की षड्दर्शन परंपरा की रक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ा रहूंगा।”
अखाड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा कि उदासीन संप्रदाय षड्दर्शन की मूल धारा है, जो सभी संप्रदायों को समाहित करने की क्षमता रखता है। इसका उद्देश्य साधु-संतों का सम्मान, सहयोग तथा सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करना है। अखाड़ा के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में संगठन नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
भईया जी की रिपोर्ट