नवादा : जिले की राजनीति में एक बार फिर बाहुबली प्रभाव और सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व मंत्री राजबल्लभ यादव और जदयू विधायक विभा देवी के बेटे के मामले में धर्मशिला देवी अस्पताल पर प्राथमिकी दर्ज होने से स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों कठघरे में हैं। परिवार का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण स्थिति गंभीर हुई, जबकि अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव दिख रहा है। यही कारण है कि पीड़ित पक्ष ने साफ तौर पर चेतावनी दी है—यदि न्याय नहीं मिला, तो मामला अदालत तक ले जाया जाएगा।
यह घटना केवल एक परिवार या एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल को जन्म देती है कि क्या बिहार में आम और खास—दोनों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही समान है? राजबल्लभ यादव का राजनीतिक सफर विवादों से भरा रहा है। 2018 में नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सजा और फिर 2025 में हाईकोर्ट से बरी होना—इन घटनाओं ने उन्हें लगातार सुर्खियों में रखा। वहीं उनकी पत्नी विभा देवी ने इस दौरान राजनीति में खुद को स्थापित किया और अब जदयू के साथ खड़ी हैं।
परिवार को हाल ही में एक और बड़ा झटका तब लगा जब मार्च 2026 में सड़क हादसे में उनके छोटे बेटे की मौत हो गई। ऐसे में अब अस्पताल पर लगे आरोपों ने इस परिवार को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह भी बिहार की उन फाइलों में दब जाएगा जहां “प्रभाव” न्याय पर भारी पड़ जाता है? यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो यह मामला न सिर्फ अदालत की चौखट तक जाएगा, बल्कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और राजनीतिक प्रभाव—दोनों पर एक बड़ा बहस भी छेड़ सकता है।
भईया जी की रिपोर्ट