नवादा : जिले में बढ़ते तापमान और लू के प्रकोप को देखते हुए जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ दीपक कुमार कुशवाहा ने पशुपालकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में पशुओं को हीट स्ट्रोक्स (तापघात) से बचाने के लिए छायादार स्थान, साफ पानी और खान-पान का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है। डॉ कुशवाहा ने बताया कि लापरवाही बरतने पर न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है, बल्कि दूध उत्पादन में भी भारी गिरावट आ सकती है।
उन्होंने जिले के पशुपालकों से अनुरोध किया है कि विभाग द्वारा समय-समय पर चलाये जा रहे टीकाकरण अभियानों में हिस्सा जरूर लें। टीकाकरण से पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा कम होता है। उन्होंने बताया कि यदि पशु हांफ रहा हो या सुस्त दिखे, तो यह डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रेस के लक्षण हो सकते हैं। पशुपालकों को सलाह दी गयी है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति या पशु के बीमार होने पर तुरंत पशुपालन हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल करें या नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल के डॉक्टरों से संपर्क करें।
गर्मी से बचाव के लिए मुख्य निर्देश
-पशुओं को छायादार और हवादार शेड या पेड़ों के नीचे रखें। टीन की छत वाले शेड पर घास-फूस या टाट डालें और संभव हो तो पानी का छिड़काव करें।
-पशुओं को 24 घंटे साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं। गर्मी में एक पशु 80 से 100 लीटर तक पानी पी सकता है।
-सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक पशुओं को तेज धूप में बाहर न ले जाएं। भैंसों को दिन में 3-4 बार नहलाएं।
-पशुओं के भोजन में हरा चारा, प्रोटीन और खनिज लवण का संतुलित मिश्रण रखें। गर्मियों में बाजरे का हरा चारा एक बेहतरीन विकल्प है।
भईया जी की रिपोर्ट