नवादा : नवादा से बिहार के दूसरे जिले में सफ़र करने वालों वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है।गया-हिसुआ-राजगीर-नालंदा-बिहारशरीफ फोरलेन सड़क परियोजना का काम अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। एनएच-82 की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा होने की जानकारी सामने आई है। सड़क तैयार होने के बाद नवादा जिले के हिसुआ समेत आसपास के इलाकों से राजगीर, नालंदा और बिहारशरीफ की यात्रा पहले से अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस सड़क से केवल आम यात्रियों को ही नहीं, बल्कि बोधगया, राजगीर और नालंदा आने वाले पर्यटकों को भी फायदा मिल सकता है।
गया से शुरू होकर हिसुआ, राजगीर, नालंदा होते हुए बिहारशरीफ तक जाने वाली यह सड़क कई महत्वपूर्ण इलाकों को आपस में जोड़ती है। नवादा जिले के हिसुआ के लिए भी इस परियोजना का खास महत्व है। फोरलेन सड़क बनने से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों को दूसरे शहरों तक आने-जाने में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, यात्रा में लगने वाला वास्तविक समय सड़क के पूरी तरह चालू होने और यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा।
एनएच-82 परियोजना के निर्माण में तेजी आने के साथ सड़क से जुड़ी कई महत्वपूर्ण संरचनाएं तैयार हो चुकी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना में 90 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज की गई है। निर्माण कार्य के एक 22.935 किलोमीटर लंबे खंड में पुलों और कल्वर्ट का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। अब बाकी बचे कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, पूरी परियोजना को आम वाहनों के लिए कब खोला जाएगा, इसकी स्पष्ट समय सीमा उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
परियोजना के निर्माण से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि सड़क के बड़े हिस्से में जरूरी संरचनाओं का निर्माण पूरा कर लिया गया है। कुल 107 एचपी कल्वर्ट बनाए जाने थे और सभी का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, 112 बॉक्स कल्वर्ट में से 108 तैयार हैं। इसके अलावा, सभी छह बड़े पुलों और 30 छोटे पुलों का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है। इन संरचनाओं के तैयार होने से परियोजना के शेष हिस्सों में काम आगे बढ़ाने में मदद मिली है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि बाकी निर्माण कार्य कब पूरा होता है और फोरलेन सड़क पर नियमित आवागमन कब शुरू हो पाता है?
फोरलेन परियोजना में दो रेलवे ओवरब्रिज बनाए जाने हैं। इनमें से एक का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे का काम अभी बाकी है। रेलवे ओवरब्रिज सड़क परियोजना की महत्वपूर्ण संरचनाओं में शामिल है। ऐसे में इसका निर्माण पूरा होना बाकी कामों में अहम माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दूसरे आरओबी के पूरा होने की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।
सड़क परियोजना से जुड़ी सबसे बड़ी उम्मीद यात्रा के समय में कमी आने की है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, गया से बिहारशरीफ तक पहुंचने में फिलहाल चार घंटे से अधिक समय लग सकता है। फोरलेन सड़क बनने के बाद यह सफर करीब ढाई घंटे में पूरा होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, यह अनुमान है। वास्तविक समय सड़क की स्थिति, यातायात और यात्रा के शुरुआती व अंतिम स्थान पर निर्भर करेगा। जिले के हिसुआ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे राजगीर और बिहारशरीफ की ओर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सफर अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
राजगीर, नालंदा और बोधगया बिहार के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल हैं। यहां देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। बेहतर सड़क संपर्क होने से इन स्थानों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इसका लाभ नवादा और हिसुआ के आसपास के कारोबारियों को भी मिल सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय बाजारों, परिवहन और दूसरे व्यवसायों को फायदा मिलने की संभावना है।
गया-हिसुआ-राजगीर-नालंदा-बिहारशरीफ फोरलेन सड़क परियोजना का निर्माण 20 अक्टूबर 2016 को शुरू हुआ था। शुरुआती योजना के अनुसार, इसे 2018 तक पूरा किया जाना था। परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 925.87 करोड़ रुपये बताई गई थी. बाद में निर्माण में देरी के कारण लागत बढ़ने की जानकारी सामने आई। पूर्व में उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, करीब 93 किलोमीटर लंबी सड़क पर लगभग 2,138 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया था।
फिलहाल, इस परियोजना में 90 प्रतिशत से अधिक काम पूरा होने की जानकारी से उम्मीद बढ़ी है कि नवादा के हिसुआ सहित आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिल सकेगा। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बचा हुआ रेलवे ओवरब्रिज और अन्य काम कब पूरे होंगे तथा लोगों को इस फोरलेन सड़क पर नियमित सफर करने का मौका कब मिलेगा?
भईया जी की रिपोर्ट