नवादा : जिले के सदर प्रखंड ओरैना पंचायत की कालीपुर गांव के वार्ड संख्या-10 में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। 28 जुलाई को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) को जांच के लिए दो चापाकलों के पानी के नमूने उपलब्ध कराए गए थे। बिहार छात्र संसद के प्रशांत मानव और मनित कुमार उर्फ मोनू ने जांच के लिए जल नमूने जमा कराए थे। जांच रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।
जांच रिपोर्ट में मिले कई मानक निर्धारित सीमा से अधिक
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नमूनों में पानी की कठोरता (हार्डनेस) और क्षारीयता (अल्केलिनिटी) आदर्श मानकों से अधिक पाई गई है। वहीं एक नमूने में टीडीएस (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर भी निर्धारित आदर्श मानक से अधिक दर्ज किया गया। इसके अलावा एक नमूने में क्षारीयता अनुमेय अधिकतम सीमा के बेहद करीब पाई गई, जो भविष्य में पानी की गुणवत्ता और प्रभावित होने का संकेत माना जा रहा है।
लंबे समय तक सेवन से हो सकती हैं स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
रिपोर्ट में पानी को तत्काल पीने के लिए असुरक्षित नहीं बताया गया है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यदि लंबे समय तक अधिक कठोर और अधिक क्षारीय पानी का सेवन किया जाए तथा समय रहते पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया जाए, तो कुछ लोगों में अपच, गैस, बदहजमी, एसिडिटी और पथरी जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह
पीएचईडी विभाग ने ग्रामीणों को फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही पानी की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।
भईया जी की रिपोर्ट