नवादा : जिले के अकबरपुर अंचल अधिकारी की तानाशाही को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी है। पूर्व प्रमुख रेणु देवी ने याचिका दायर कर अंचल अधिकारी द्वारा अनधिकृत रूप से भवन निर्माण पर लगायी गयी रोक को निरस्त कर कार्रवाई की मांग गुहार लगायी है। याचिका में जिले के राजस्व अधिकारियों द्वारा आवेदन के बावजूद अंचल अधिकारी के आदेश को नियम कानून को धत्ता बताते हुए उचित ठहराये जाने को चुनौती देते हुए संबंधित को आरोपी बनाया गया है। मामला नया सर्वे व पुराना सर्वे से जुड़ा बताया गया है।
क्या है मामला:-
रेणु देवी ने फतेहपुर – नरहट पथ पर गांव के ही अनिल कुमार सिन्हा से खाता नम्बर 566 प्लाट नम्बर 1424 एराजी 26 डि में से 19 डी भूमि की खरीदारी की थी। उक्त भूमि का दाखिल खारिज के साथ अद्यतन राजस्व का भुगतान किया जा रहा है। कुछ भाग पर मकान निर्माण कार्य करा निवास कर रही हैं तो कुछ परती है।
परती भूमि पर निर्माण कार्य आरंभ कराते ही कतिपय असामाजिक तत्वों ने अंचल अधिकारी को खाता नम्बर 1771 अनावाद बिहार सरकार बताते हुए मिट्टी भराई पर रोक की मांग कर दी और उन्होंने बगैर किसी जांच पड़ताल थानाध्यक्ष को अविलंब रोक लगाने का आदेश निर्गत कर दिया।
उन्होंने अंचल अधिकारी से अपनी भूमि मापी का अनुरोध किया गया तथा भूमि की मापी करा सिमांकन भी कर दिया बावजूद पूर्व के आदेश को निरस्त करने से इंकार कर दिया। रेणु देवी ने रजौली एसडीएम व अपर समाहर्ता को आवेदन देकर अंचल अधिकारी के आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया लेकिन अंचल अधिकारी के आदेश को निरस्त करने से सभी ने इंकार कर दिया।
क्या है सच्चाई:-
सबसे बड़ा सवाल यह कि बिहार सरकार नया सर्वे को तथा जमीन का ख़रीद फरोख्त के साथ दाखिल खारिज व भूलगान भी नया सर्वे के आधार पर वसूली जा रही है। ऐसे में यह कहना कि पुराने सर्वे में सर्व साधारण बिहार सरकार की भूमि है राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देने के समान है।
क्या है सच्चाई:-
प्लाट नम्बर 1771 पुराने सर्वे के अनुसार मालिक गैरमजरुआ था न कि सर्वसाधारण बिहार सरकार। उक्त प्लाट से चौदह प्लाट का निर्माण हुआ और सभी अपनी अपनी भूमि पर भवन निर्माण करा निवास कर रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल जब अन्य लोग भवन निर्माण करा निवास कर रहे हैं तब सिर्फ एक की भूमि पर रोक क्यों? इससे स्पष्ट होता है कि भूमि के मामले में अंचल अधिकारी की तानाशाही चल रही है न कि बिहार सरकार भूमि राजस्व का कानून। उक्त मामले को पूर्व प्रमुख ने पूरे साक्ष्य के साथ जिसे रजौली एसडीएम व अपर समाहर्ता ने मानने से इंकार कर दिया था उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न केवल चुनौती दी है बल्कि संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की गुहार लगायी है।
भईया जी की रिपोर्ट