केंद्र की मोदी सरकार ने बिहार समेत कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिये हैं। रि.ले. जनरल सैयद अता हसनैन बिहार के नए राज्यपाल होंगे। लेकिन बिहार के लिए सबसे बड़ी नियुक्ति वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विस अध्यक्ष नंद किशोर यादव के रूप में सामने आई। श्री नंद किशोर यादव को नागालैंड के राज्यपाल बनाया गया है। नंदकिशोर यादव ने 1978 में पटना नगर निगम के वार्ड पार्षद से बिहार की राजनीति में कदम रखा। वह पटना साहिब से सात बार भाजपा के टिकट पर विधायक रहे। परंतु पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। फिर भी नंद किशोर यादव अपनी पार्टी के मजबूत स्तंभ बने रहे और उन्होंने पटना सिटी क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार की जीत में अहम रोल अदा किया। इसका उन्हें पुरस्कार भी मिला और वे अब नगालैंड के राज्यपाल बना दिये गए हैं। नंद किशोर यादव के पास राजनीति का लंबा अनुभव है। वो बिहार सरकार में मंत्री, बिहार बीजेपी के अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं।
नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किये जाने पर नंद किशोर यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि—मुझे केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। मैं अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करुंगा। देश हित में जो भी जरूरत होगी वैसे फैसले लेने का काम करूंगा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। अगर नंदकिशोर यादव के प्रोफाइल की बात करें तो राजधानी पटना में जन्मे श्री यादव युवावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित हुए और वे छात्र जीवन के दौरान ही आरएसएस की सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए। इसी दौर में उन्होंने छात्र आंदोलनों और जनसरोकार के मुद्दों पर काम करना शुरू किया। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और संगठन के विभिन्न पदों पर काम करते हुए पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
नंदकिशोर यादव का तब पहली बार सक्रिय राजनीति में प्रवेश हुआ जब 1978 में वे पटना सिटी क्षेत्र से वार्ड काउंसलर बने और फिर 1982 में डिप्टी मेयर बन गए। बिहार भाजपा के पितामह कहे जाने वाले कैलाशपति मिश्र ने नंदकिशोर यादव की कार्यक्षमता को पहचाना और वे उन्हें भाजपा में ले आये तथा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। बाद में नंदकिशोर यादव बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी बनाए गए। नंद किशोर यादव का सक्रिय चुनावी जीवन 1995 में शुरू हुआ, जब वे पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने कई बार इस सीट से जीत दर्ज की और पटना की शहरी राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। नंदकिशोर यादव सात बार विधायक रहे और बिहार सरकार में मंत्री तथा विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी आसीन हुए।
भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार के दौरान नंद किशोर यादव ने सड़क निर्माण और पथ निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के कारण उन्हें पार्टी का भरोसेमंद नेता माना जाता है और वह मजबूत संगठन कर्ता भी माने जाते थे। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पटना सिटी सीट से उनका टिकट काट दिया था। उनकी उम्र 75 वर्ष से अधिक हो गई थी, और संभवत: इसी वजह से उन्हें टिकट नहीं दिया गया। भाजपा ने उनकी जगह पटना साहिब सीट से रत्नेश कुशवाहा को मैदान में उतारा। लेकिन नंद किशोर यादव ने टिकट न मिलने की तनिक भी नाराजगी जाहिर नहीं की और पार्टी के लिए रात—दिन काम करते रहे। और अब उन्हें नागालैंड का राज्यपाल बनाकर पार्टी ने उचित सम्मान से नवाज दिया।