बिहार विधानमंडल के 5 दिवसीय मानसून सत्र का आगाज आज विपक्ष के भारी हंगामे से हुआ। विधानसभा के पोर्टिको में विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया जिस दौरान विपक्षी विधायक पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करते नजर आए। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी विधायकों ने नई शिक्षा नीति के विरोध में नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्तापक्ष के विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के विदेश दौरे को लेकर काउंटर अटैक किया। मानसून सत्र में सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी। 23 जुलाई को इस बजट पर चर्चा होगी जिसके बाद सरकार सदन में अपना जवाब देगी। सरकार इस सत्र में कुल 13 अहम विधेयक भी पेश करेगी।
आज जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, मंत्री निशांत कुमार को उनके जन्मदिन की बधाई के बाद 87383.4301 करोड़ का अनुपूरक बजट डिप्टी सीएम विजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन पटल पर रखा। इसमें राज्य स्कीम मद में 24370.72 करोड़ है, जबकि शेष केंद्र प्रायोजित स्कीम के लिए राशि रखा गया है। इससे पहले आज जदयू के खालिद अनवर ने नेता प्रतिपक्ष के बिहार से गायब रहने और विदेश दौरे पर रहकर राज्य की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए उनपर जमकर हमला किया। आज विधानसभा में कुल 10 विधेयक सदन पटल पर रखे गए। 21 और 22 जुलाई को चर्चा के बाद विधेयक पास कराए जाएंगे। इसके बाद सोमवार को निर्धारित कार्यवाही पूरी होने के बाद बिहार विधानसभा की बैठक स्थगित कर दी गई। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने घोषणा की कि अब सदन की अगली बैठक मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू होगी।
इससे पहले आज सुबह बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू होते ही सदन के बाहर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। विपक्षी विधायक नई शिक्षा नीति के खिलाफ तख्तियां लेकर पहुंचे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्ष के विधायकों का मानना है की नीट पेपर लीक में सरकार कई हम लोगों को बचा रही है जिनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. इसी के मांग को लेकर आज तमाम विधायक विरोध करते हुए विधानसभा पहुंचे हैं। उधर आज ही सुबह जब मुख्यमंत्री सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने विधानसभा पहुंचे तो सत्तापक्ष के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। सम्राट चौधरी सरकार के कार्यकाल का यह पहला मानसून सत्र है, जिसे राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।