लैंड‑फॉर‑जॉब केस में लालू परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस केस की सुनवाई को अब फास्ट ट्रैक करते हुए मार्च से रोजाना सुुनवाई तय कर दी है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई जिसमें लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। इसके अलावा इस मामले में आरोपी लालू यादव की बेटी मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत तौर पर अदालत में हाजिर हुईं। राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि अब वह 9 मार्च से रोज़ाना लैंड‑फॉर‑जॉब मामले में सुनवाई शुरू करेगा। सुनवाई के दौरान मीसा भारती और हेमा यादव ने आरोपों से इनकार किया, जबकि लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए।
कोर्ट ताज निर्णय से यह साफ हो गया कि अब लैंड‑फॉर‑जॉब मामले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें लगातार बढ़ने वाली हैं। अदालत ने कहा कि 9 मार्च से डे‑टू‑डे आधार पर इस मामले में ट्रायल शुरू करने का फैसला किया गया है। हाल ही में अदालत ने इस मामले में लालू परिवार सहित कुल 41 आरोपियों पर आरोप तय किए हैं, जिससे ट्रायल का रास्ता अब साफ हो गया है। सोमवार को इस मामले में मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने सीबीआई द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे मुकदमे का सामना करने को तैयार हैं और किसी भी प्रकार की गलत कार्रवाई से इंकार करती हैं।
दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए और कोर्ट से व्यक्तिगत पेशी में छूट मांगी जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस साल जनवरी में कोर्ट ने इस केस में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि आरोपियों के खिलाफ कथित तौर पर एक ‘ओवरआर्चिंग क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी’ का मामला बनता है जिसमें रेलवे की नौकरियों का इस्तेमाल जमीन हासिल करने के लिए सौदेबाज़ी के रूप में किया गया। जज ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक रोजगार को व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करने के पर्याप्त सबूत प्रारंभिक रूप से मौजूद हैं। दरअसल, यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। सीबीआई की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि रेलवे में ग्रुप‑D नौकरियां देने के बदले उम्मीदवारों के परिवारों ने जमीन के छोटे‑छोटे प्लॉट लालू परिवार या उनसे जुड़े लोगों के नाम ट्रांसफर किए। यह ट्रांसफर बिहार के कई जिलों में हुआ और बाद में इन जमीनों को परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज किया गया।