किशनगंज के दिघलबैंक पंचायत अंतर्गत सुल्तानगंज गांव में मिट्टी का टीला ढहने से तीन बच्चियां जिंदा दफन हो गईं। इस हादसे में मारी गईं बच्चियों में दो सगी बहनें बताई जाती हैं। जानकारी के अनुसार ये तीनों लड़कियां अपने घर की लिपाई के लिए एक टीले से मिट्टी काटने गईं थी। इसी दौरान मिट्टी का भारी टीला भरभरा कर ढह गया और तीनों लड़कियां उसके मलबे में दब गईं। तीनों लड़कियों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में जमशेद आलम की दो बेटियां क्रमश: 9 और 10 वर्ष की निशा परवीन और नगमा परवीन शामिल हैं। इनके साथ इस हादसे में मारी गई तीसरी बच्ची इन बच्चियों के चाचा फरियाद आलम की 8 वर्षीया बेटी रूबी खातून बताई जाती है। एक ही कुनबे की तीन बच्चियों की मौत से गांव में मातम पसर गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि बीते दिन तीनों लड़कियां आपस में घर के पास ही एक टीले से मिट्टी कादने गई थीं। बच्चियां कुदाल से मिट्टी काट रही थीं, तभी अचानक ऊपर से मिट्टी का भारी-भारकम हिस्सा भरभराकर उनके ऊपर गिर गया। सबकुछ इतना अचानक हुआ कि मासूमों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और तीनों लड़कियां मिट्टी के नीचे दफन हो गईं। घटना के वक्त आसपास मौजूद लोगों ने जब मिट्टी गिरते देखा तो शोर मचाना शुरू किया। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण फांवड़े और कुदाल लेकर मौके की तरफ दौड़े। लेकिन जब तक मिट्टी हटाकर तीनों बच्चियों को बाहर निकाला गया, उनकी मौत हो चुकी थी।
बाद में सूचना पर दीघलबैंक थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों से जानकारी लेने के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की बात कही। लेकिन परिजनों और गांव वालों ने यह कहते हुए शवों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया कि इनकी मौत एक हादसे में हुई है। इसके बाद तीनों बच्चियों को गांव के ही निकट के कब्रिस्तान में सुपुर्द एक खाक कर दिया गया। एक ही आंगन से तीन मासूम बच्चियों का जनाजा उठते ही वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और लोग जोर—जोर से रोने लगे।।
