जमीन कब्जाने और फायरिंग के मामले में आज सोमवार की सुबह गोपालगंज पुलिस ने कुचायकोट विधानसभा सीट से जेडीयू विधायक पप्पू पांडेय के घर पर छापेमारी की। विधायक के गांव में छापेमारी के दौरान न तो विधायक वहां मिले और न उनके भाई जिनकी तलाश में यह छापेमारी की गई थी। पुलिस ने विधायक पप्पू पांडेय और उनके भाई के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है। एसपी विनय तिवारी के नेतृत्व में 5 थानों की पुलिस ने विधायक के गांव में छापेमारी की, लेकिन विधायक और उनके भाई सतीश पांडेय वहां नहीं मिले। बताया जा रहा है कि इस रेड में पांच थानों की पुलिस शामिल थी। यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन कब्जाने से जुड़ा है और भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप भी उनपर लगा है। जानकारी के अनुसार अदालत ने विधायक और उनके भाई सतीश पांडेय के अलावा उनके सीए राहुल तिवारी के विरुद्ध भी गैरजमानती वारंट जारी किया है।
भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप
गोपालगंज एसपी के मुताबिक कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में भू-माफियाओं द्वारा जमीन कब्जाने और उन्हें संरक्षण देने के आरोप में विधायक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गयी थी। इसी केस में अदालत ने गैरजमानती वारंट जारी किया है। एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीमें अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं।फिलहाल पुलिस कार्रवाई के कारण विधायक और उनके भाई अंडरग्राउंड हो गए हैं। कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन कब्जाने के आरोप में मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव के रहने वाले जितेंद्र कुमार राय ने 1 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने भू-माफिया सिवान के रहने वाले भोला पांडेय समेत 4 बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसी केस में विधायक और उनके भाई पर साजिशकर्ता के तौर पर आरोप लगाते हुए उन्हें अभियुक्त बनाया गया था।
इस मामले में पुलिस पहले ही सिवान निवासी भोला पांडेय समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर विधायक और उनके भाई को साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया गया है। इसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए गैरजमानती वारंट पुलिस को अदालत से मिला है। हालांकि, विधायक और उनके भाई अंडरग्राउंड हो चुके हैं, लेकिन उनके संभावित ठिकानों पर पुलिस लगातार दबिश दे रही है। गोपालगंज में विधायक के खिलाफ इस कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें एक जनप्रतिनिधि की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।