केंद्र की मोदी सरकार ने बिहार समेत कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिये हैं। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है। उन्हें वर्तमान राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह नियुक्त किया गया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिहार में गवर्नर बदलने का यह काम ऐसे समय में हो रहा है, जब नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं और प्रदेश में नए सीएम के नाम पर कयासबाजियों का दौर शुरू है। सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के एक टॉप जनरल, रणनीतिकार, विद्वान और लेखक की पहचान रखते हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी के 40 साल भारतीय फौज को दिए हैं। खासकर जम्मू-कश्मीर में उन्होंने काफी साल फोर्स का नेतृत्व किया है। J&K में 15वीं चिनार कोर की इन्होंने कमान संभाली जिस दौरान ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ को लागू किया। इस नीति में सुरक्षा अभियान के साथ आम लोगों से संवाद और सहयोग बढ़ाना अहम होता है। इस नीति को घाटी में उग्रवाद कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना गया और आम लोगों का सेना पर भरोसा काफी बढ़ गया।
शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई, डीयू से ग्रेजुएशन
जनरल हसनैन ने उत्तराखंड में नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में बीए ऑनर्स किया और फिर लंदन के ‘रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज’ और हवाई के ‘एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज’ से वैश्विक सुरक्षा और रक्षा रणनीतियों का शिक्षा ली थी। इसके बाद सैयद अता हसनैनन ने इंडियन मिलिट्री एकेडमी से ग्रेजुएशन करने के बाद वे गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने सेना में सेवा के उच्च मानदंडों को प्राप्त किया तथा चिनार कोर की कमान संभाली। कश्मीर घाटी की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने ‘जनसंपर्क’ और ‘रणनीति’ का बेहतरीन तालमेल दिखाया। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फोर्स 21 कोर की कमान का नेतृत्व किया। 2013 में सेवानिवृत्ति से पहले उन्होंने सेना मुख्यालय में सैन्य सचिव के महत्वपूर्ण पद पर भी कार्य किया।
ले. जनरल को मिले सम्मान और पदक
अपने 40 साल के करियर में जनरल हसनैन को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए कई अवॉर्ड से नवाजा गया। इसमें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक, सियाचिन ग्लेशियर मेडल और UN मिशन पदक शामिल हैं। ले जनरल हसनैन 2013 में सेना से विदा लेने के बाद भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। 2018 में उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का चांसलर नियुक्त किया गया। वह राष्ट्रीय सुरक्षा, भू-राजनीति और रक्षा मामलों पर एक प्रमुख स्तंभकार और वक्ता के रूप में अपनी राय रखते रहे हैं। परिवार की बात करें तो सैयद अता हसनैन की पत्नी सबीहा हसनैन एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर एग्जिक्यूटिव हैंं उनकी दो बेटियां हैंं। एक हाई-प्रोफाइल सार्वजनिक जीवन के बावजूद, उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन को निजी और गरिमापूर्ण बनाए रखा है।