बांग्लादेशियों समेत कई विदेशी नागरिकों का जाली दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड और भारतीय पासपोर्ट बनाने वाले मास्टरमाइंड एजाज कमर को पुलिस ने राजधानी पटना से दबोच लिया है। इस गिरफ्तारारी को मुजफ्फरपुर पुलिस और खुफिया विभाग की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार एजाज कमर मूल रूप से आरा का रहने वाला है और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के सरगना के तौर पर वह अपना सिंडिकेट पंजाब के चंडीगढ़ से चलाता है। एजाज के बारे में पता चला है कि वह खुद एम टेक है और उसकी पत्नी लंदन में जॉब करती है। एजाज ने सरकारी बैंकों में आधार सेंटर चलाने के लिए वेंडरशीप ले रही है। इसी आधार पर बिहार में मुजफ्फरपुर के अलावा पटना, हाजीपुर, खगड़िया समेत कई जिलों में एजाज ने अपने ऑपरेटर के जरिए मशीन व लॉगिन-पासवर्ड मुहैया कराया है, जिसके इस्तेमाल से हजारों फर्जी आधार बनाए गए हैं।
दरअसल मुजफ्फरपुर में नगर थाना से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर कन्हाई कम्यूनिकेशन के नाम से उसका एक फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का सेंटर चल रहा था। पुलिस की जांच में यहां बांग्लादेशी नागरिक के नाम पर बने पासपोर्ट का रिकॉर्ड और कई अन्य दस्तावेज बरामद हुए। इसके बाद पुलिस जांच के क्रम में पटना पहुंची और एजाज कमर को दबोचा गया। एजाज कमर की ट्रैवल हिस्ट्री में लंदन कनेक्शन भी सामने आया जिसके बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस के मुताबिक कन्हाई कम्युनिकेशन पर छापेमारी के दौरान लैपटॉप, आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर, यूआईडीएआई मशीन, फिंगरप्रिंट और आई स्कैनर समेत कई सामान बरामद किए गए। यहां आठ मूल आधार कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे। जांच में सामने आया कि फर्जी आधार तैयार करने के बाद उनका इस्तेमाल पासपोर्ट बनवाने के लिए किया जाता था।
इससे पहले इसी मामले की जांच में बांग्लादेशी नागरिक बेलाल होसेन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मो. आफताब के नाम से पासपोर्ट जारी होने का मामला सामने आ चुका है। मुजफ्फरपुर का यह मामला इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि कुछ दिन पहले बिहार में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बन जाने का मामला सामने आया था। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी की ओर से भेजी गई जानकारी के मुताबिक बिहार के पते पर 31 संदिग्ध अफगानी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट जारी होने की बात सामने आई थी। इनमें 30 लोगों के पास अफगानिस्तान का पासपोर्ट भी होने की जानकारी दी गई थी। जांच में यह भी सवाल उठा था कि इन लोगों ने भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए फर्जी आधार या दूसरे पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे किया और पुलिस सत्यापन के बाद भी पासपोर्ट कैसे जारी हो गए।
जांच में बिहार के पते पर दो बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इनमें एक मामला सीधे मुजफ्फरपुर से जुड़ा है। बांग्लादेशी नागरिक बेलाल होसेन के लिए मुजफ्फरपुर के दीवान रोड का पता इस्तेमाल कर मो. आफताब के नाम से पासपोर्ट जारी कराया गया था। पुलिस के मुताबिक इस पासपोर्ट में इस्तेमाल दस्तावेज फर्जी थे। पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि फर्जी आधार बनाने का नेटवर्क पटना समेत उत्तर बिहार के दूसरे इलाकों तक फैला हो सकता है। सूत्रों की जानकारी के मुताबिक पटना के एक अधिकृत आधार सेंटर के कर्मी के लॉगिन और पासवर्ड का इस्तेमाल मुजफ्फरपुर में फर्जी आधार बनाने के लिए किए जाने की बात भी सामने आई है। इन फर्जी आधार के जरिए बांग्लादेशी और अफगानी नागरिकों के पासपोर्ट तक बनवाए जाने की जांच की जा रही है।