बिहार में आरा की रहने वाली और नक्सलियों से दो—दो हाथ करने वाली रणबीर सेना प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह ने संघ लोकसेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल की है। इस रैंक के साथ उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए क्वालिफाई किया है। UPSC में 301वीं रैंक के साथ ही उन्हें पुलिस सेवा की ट्रेनिंग के लिए चयनित किया गया है। मालूम हो कि रणबीर सेना एक ऐसे संगठन के तौर पर जाना जाता है जिसका गठन बिहार में नक्सलियों के खिलाफ ऊंची जातियों के लोगों द्वारा किया गया था। 1990 के दशक में बिहार में जातिगत संघर्ष के दौर में यह संगठन कई हिंसक घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा। उस समय इसका मुकाबला वामपंथी उग्रवादी संगठन MCC से होता था।
कोहली के जज़्बे से प्रभावित आकांक्षा
ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा ने कैथोलिक हाई स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और 2017 में 10वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने आरा स्थित हरप्रसाद दास जैन कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स किया। इसके बाद आकांक्षा ने अपनी UPSC की तैयारी के लिए पटना आकर रहना शुरू किया। यहां उन्होंने पूरी तरह से तैयारी की और अपनी दूसरी कोशिश में UPSC सिविल सर्विसेज़ परीक्षा पास कर ली। तैयारी के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए एक स्थानीय स्कूल में पढ़ाने का भी अनुभव लिया। आकांक्षा ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि उनकी सफलता में कड़ी मेहनत का अहम योगदान है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें क्रिकेटर विराट कोहली के जज़्बे और हिम्मत से बहुत प्रेरणा मिलती है।
भोजपुर का नाम रोशन किया
आकांक्षा के पिता इंदुभूषण सिंह एक किसान हैं और उन्होंने अपनी बेटी की कामयाबी पर खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके लिए एक बहुत इमोशनल पल है। बेटी की सफलता पर उन्होंने कहा, ‘लोगों के फोन कॉल और शुभकामनाओं से मैं बेहद खुश हूँ। आकांक्षा समाज की बेटी है और देश के निर्माण में अपना योगदान देगी।’ उनकी चचेरी बहन अनुपमा सिंह ने कहा, ‘उसने भोजपुर और बिहार का नाम रोशन किया है।’ बता दें कि रणबीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया इस संगठन के प्रमुख थे। वर्ष 2012 में उनकी हत्या कर दी गई थी। वे बिहार के भोजपुर जिले के खोपिरा गांव के रहने वाले थे। उस समय बिहार में जातिगत संघर्ष अपने चरम पर था। इसी दौर में उन्होंने ऊंची जाति के लोगों से ‘सोना बेचो, लोहा खरीदो’ का नारा देते हुए हथियार खरीदने की अपील की थी। भोजपुर जिले के बेलौर और एकबारी समेत आसपास के कई गांवों में जातीय तनाव के कारण कई भीषण नरसंहार की घटनाएं हुईं, जो वर्ष 2003 तक अलग-अलग रूप में जारी रहीं।