पटना। राजधानी पटना स्थित भारत विकास एवं संजय आनंद विकलांग अस्पताल के 27वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने कहा कि वर्ष 2047 तक बिहार को दिव्यांगता मुक्त बनाने का लक्ष्य साकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस संकल्प और निष्ठा के साथ यह संस्था कार्य कर रही है, वह वास्तव में अविश्वसनीय है।राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं समाजसेवियों से अपील की कि जो लोग अभी तक इस संस्था से नहीं जुड़े हैं, वे आगे आएं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से इस सेवा कार्य से जुड़ने का आह्वान किया। अस्पताल परिसर का भ्रमण कर सेवाओं का अवलोकन करते हुए उन्होंने कहा कि यहां दी जा रही सेवाएं लाजवाब और प्रेरणादायक हैं।
अप्रवासी भारतीय सुनील आनंद ने कहा कि बिहार आकर वे स्वयं को बिहारी महसूस करते हैं और यहां उन्हें जो सम्मान मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता। समारोह के अतिविशिष्ट अतिथि मेघालय एवं सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने दिव्यांगजनों के लिए की जा रही सेवा को अतुलनीय बताया। सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने कहा कि दिव्यांगों की सेवा करना ईश्वर की आराधना के समान है। प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं अस्पताल के संरक्षक डॉ. एस.एस. झा ने कहा कि इस संस्था के माध्यम से उन्हें पीड़ित दिव्यांगों की सेवा करने का अवसर मिला है, जिसके लिए वे आभारी हैं। पटना की महापौर सीता साहू ने कहा कि यहां दिव्यांगजनों की सेवा को ईश्वर की पूजा के रूप में किया जाता है।
इस अवसर पर बाल मुकुंद कॉनकास्ट प्रा. लि. द्वारा निर्मित सेवा वाटिका का उद्घाटन राज्यपाल आर.एन. रवि एवं पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने संयुक्त रूप से किया। साथ ही संजीव कानोडिया को शॉल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। चंचल चिड़िया फाउंडेशन द्वारा लघु नाटिका “हौसलों की उड़ान” का प्रभावशाली मंचन भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन निधि माथुर ने किया, जबकि स्वागत भाषण अस्पताल के चेयरमैन देशबंधु गुप्ता ने दिया। पद्मश्री बिमल जैन ने अस्पताल की सेवाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन प्रबंध न्यासी विवेक माथुर ने करते हुए सभी से सहयोग की अपील की। समारोह में सार्क जर्नलिस्ट फोरम बिहार के अध्यक्ष एवं मानवाधिकार पत्रकार डॉ. शशी भूषण कुमार, पद्मश्री जितेंद्र कुमार सिंह सहित अनेक चिकित्सक, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ एवं समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट