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बिहारी समाज

आम राय की अनदेखी से बाढ़ की समस्या : दिनेश मिश्र

सिविल इंजीनियरिंग पढ़कर आए लोगों को लगता है कि गांव वाले अनपढ़ हैं, भला उन्हें नदी के प्रवाह के बारे में क्या जानकारी है! यही सबसे बड़ी गलती. . . .

Swatva Desk
Last updated: April 5, 2026 9:31 pm
By Swatva Desk 78 Views
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3 Min Read
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पटना: बाढ़ की समस्या के निराकरण नहीं होने के पीछे मूल कारण है स्थानीय लोगों की राय की अनदेखी। हमें यह याद रखना चाहिए कि हमें नदी के अनुसार चलना होगा, जबकि हमलोग अपनी बसावट के अनुसार नदी को नियंत्रित करने लगते हैं। उक्त बातें नदी व बाढ़ विशेषज्ञ दिनेश कुमार मिश्र ने कहीं। रविवार को किताब उत्सव कार्यक्रम में अपनी सद्य प्रकाशित पुस्तक पानी का शाप के विमोचन के बाद हुई परिचर्चा में वे अपनी बात रख रहे थे।

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उन्होंने कहा कि सिविल इंजीनियरिंग पढ़कर आए लोगों को लगता है कि गांव वाले अनपढ़ हैं, भला उन्हें नदी के प्रवाह के बारे में क्या जानकारी है! यही सबसे बड़ी गलती है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बाढ़ या नदी से जुड़े किसी प्रोजेक्ट में कार्यरत अभियंता के लिए रिटायरमेंट उसका सेफ पैसेज होता है। वह मानकर चलता है कि किसी परियोजना का अगर दीर्घकाल में दुष्प्रभाव होगा, तब तक वह रिटायर कर आराम कर रहा होगा। जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण नदी परियोजनाओं में ठोस कार्य नहीं होता है। उन्होंने दूसरा कारण चुनावी राजनीति और लालफीताशाही को बताया।

नेपाल के सप्तकोसी नदी पर बांध बना देने से क्या बिहार में बाढ़ की समस्या हल हो जाएगी? इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सबसे पहले 1937 में बिहार में बाढ़ की समस्या को लेकर सेमिनार हुआ। उसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह से लेकर तत्कालीन मुख्य अभियंता कैप्टन कॉल तक उपस्थित थे। उसमें विचार आया कि सप्तकोसी नदी पर 800 फिट ऊंचा बांध बना सकते हैं।

बिहार और बाढ़ के संबंध में उन्होंने कहा कि 1968 में कोसी नदी में अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ आई। तब पश्चिमी नहर बना। बाद में पूर्वी तटबंध बना। हालांकि, बिहार में बाढ़ को लेकर 1953-54 से ही कार्य हो रहे हैं और समस्या बढ़ती जा रही है। शुरू में तटबंध की लंबाई केवल डेढ़ सौ किमी होनी थी, जो आज बढ़कर 3800 किमी हो गई है। बाढ़ क्षेत्र २५ लाख हेक्टर से बढ़कर तीन गुना हो गया है। दुःख की बात है कि इतने दशकों में सरकार को इतनी सी बात समझ नहीं आई कि बाढ़ नियंत्रण के उसके तरीके और सोच दोनों गलत हैं।

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इस परिचर्चा के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग के उदयकांत मिश्र ने बाढ़ आपदा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को विस्तार से बताया। दोनों विशेषज्ञों से वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र ने बातचीत की। इस दौरान राजधानी के कई बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

TAGGED: barh, Flood, Kitab Utsav, दिनेश कुमार मिश्र, बाढ़
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