बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने सहरसा के नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को गबन और वित्तीय अनियमितता के आरोप में तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। नगर आयुक्त पीके झा पर यह कार्रवाई करीब 8 करोड़ 44 लाख रुपये की चार बड़ी विकास परियोजनाओं में अनियमितता के मामले में की गई है। मामले की जांच के बाद उनको सस्पेंड किया गया है। सरकार के आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मगध प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है। बिहार सरकार की इस कार्रवाई को नगर निकायों में विकास योजनाओं के टेंडर और सरकारी राशि के खर्च में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर बड़ी परियोजनाओं को छोटी योजनाओं में बांटकर काम कराने के मामले ने सरकारी खरीद और निविदा प्रक्रिया के पालन पर गंभीर सवाल खड़े किए, जिसके बाद जांच में उक्त गड़बड़ी का पता चला।

सहरसा नगर आयुक्त पीके झा पर करीब 8 करोड़ 44 लाख रुपये की चार बड़ी विकास परियोजनाओं में गड़बड़ी करने का आरोप है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से गठित पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह कार्रवाई की है। दरअसल, सहरसा नगर निगम में प्रभात कुमार झा के कार्यकाल के दौरान करीब 8.44 करोड़ रुपये की लागत वाली चार बड़ी परियोजनाओं में अनियमितता की शिकायत सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसकी जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की। समिति को परियोजनाओं से जुड़े कार्यों, दस्तावेजों और टेंडर प्रक्रिया की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति की जांच के दौरान एक अहम बात सामने आई जिसमें पता चला कि इन चार बड़ी परियोजनाओं को 68 छोटी-छोटी योजनाओं में विभाजित कर काम कराया गया। आरोप है कि टेंडर की निर्धारित प्रक्रिया से बचने के लिए ऐसा किया गया। बड़ी परियोजनाओं को छोटे हिस्सों में बांटकर काम कराने के पीछे सरकारी नियमों और निर्धारित निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं करने की मंशा बताई गई। पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन आरोपों को सही पाया और समिति ने जांच रिपोर्ट नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंप दिया। इसी रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार ने प्रभात कुमार झा के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
