जदयू से निष्कासित मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। ‘छोटे सरकार’ के संबोधन से नवाजे गए अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्या केस में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव के पोते की अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। मार्च 2026 में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। लेकिन दुराचंद के पोते नीरज की सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने ऐसा काम कर दिया जिससे सुप्रीम कोर्ट को अनंत सिंह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना पड़ा। यह सब जदयू से बगावत के बाद ही संभव हो पाया। राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने सुप्रीम अदालत को बताया कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। साथ ही पटना हाई कोर्ट से मिली उनकी जमानत रद्द करने की मांग भी बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कर दी। बस बिहार सरकार की ये दलीलें ‘छोटे सरकार’ पर नकेल डालने के लिए काफी सिद्ध हुईं।

सम्राट सरकार की 5 दलीलों ने बढ़ाई टेंशन
पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दुलारचंद यादव का परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार ने भी अपना पक्ष रखा। सरकार ने अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में इस सिलसिले में कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया था। इस हलफनामे में बिहार सरकार ने तीन अहम दलीलें दी थीं।
- बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दुलारचंद मामले में एसडीपीओ और एसपी के स्तर पर किए गए सुपरविजन के बाद जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। सरकार का कहना था कि इस केस में अनंत सिंह का नाम शामिल है।
- बिहार सरकार के हलफनामे में अनंत सिंह के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट सहित कुल 62 आपराधिक मामलों का जिक्र किया गया है। सरकार का कहना था कि अनंत सिंह पर समय समय पर ये केस दर्ज हुए हैं। यानी अनंत सिंह आदतन मुजरिम हैं।
- बिहार सरकार के मुताबिक दुलारचंद हत्या केस में अनंत सिंह पर जो आरोप लगे हैं, वो सही पाया गया है। ऐसे में उनका जेल से बाहर रहना ठीक नहीं है। बिहार सरकार ने इस मामले में जमानत रद्द करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता और बिहार सरकार की सारी दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हाईकोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत को जमानत देते समय उनके खिलाफ दर्ज पुराने केसों को भी नजरंदाज कर दिया। यह सही नहीं है। कोर्ट ने इसके बाद अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद करते हुए उनको 1 दिसंबर तक सरेंडर करने के लिए कहा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 बड़ी बातें
- कोर्ट ने कहा कि इसे सिर्फ राजनीतिक हत्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। दरअसल, अनंत सिंह के पक्ष का कहना था कि हत्या चुनाव के वक्त हुई थी। इसी कारण से उनका नाम शामिल है।
- सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मामले में जांच जारी है। उसके बाद मुकदमे के समय गवाहों का परीक्षण होगा। हम सरेंडर करने का आदेश देते हैं। आरोपी 1 दिसंबर तक सरेंडर करे।
- बिहार पुलिस 4 महीने में जांच पूरी करे। अनंत सिंह ने बेटी की शादी का हवाला देते हुए तुरंत सरेंडर ना करने का अनुरोध किया था जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
