अरवल – जिले के सभी 852 आंगनबाड़ी केंद्रों पर “आंगन का मिलन” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष कार्यक्रम 29 एवं 30 सितम्बर तथा 01 अक्टूबर तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर मुख्य रूप से अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से छह माह की आयु पूर्ण करने वाले बच्चों के बेहतर पोषण एवं सर्वांगीण विकास के लिए माताओं एवं अभिभावकों को पूरक आहार के महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
छः माह के बाद मां के दूध के साथ पूरक आहार के महत्व की दी गई जानकारी-अन्नप्राशन कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य माताओं एवं अभिभावकों को यह जानकारी देना रहा कि शिशु के जन्म के छः माह पूर्ण होने के उपरांत मां के दूध के साथ-साथ आयु के अनुरूप पर्याप्त एवं पौष्टिक पूरक आहार की शुरुआत किया जाना आवश्यक है। इस दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा बच्चों के पोषण, स्वच्छता, उचित खान-पान एवं स्वस्थ विकास से संबंधित आवश्यक जानकारी साझा की गई।
माताओं को बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों का उपयोग करने, आहार में विविधता बनाए रखने तथा बच्चों की आयु के अनुसार उचित मात्रा एवं अंतराल पर पूरक आहार देने के संबंध में भी जागरूक किया गया। सामुदायिक सहभागिता के साथ आंगनबाड़ी सेवाओं की दी गई जानकारी “आंगन का मिलन” कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषक क्षेत्र की महिलाओं, माताओं, अभिभावकों एवं अन्य ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उन्हें आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सेवाओं एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई।
इस दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, नियमित टीकाकरण कार्यक्रम तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान सहित महिला एवं बाल विकास से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं एवं सेवाओं के बारे में उपस्थित लाभार्थियों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से लाभार्थियों को आंगनबाड़ी केंद्रों से नियमित रूप से जुड़ने तथा बच्चों एवं महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य एवं समुचित विकास से संबंधित सेवाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। जिला प्रशासन द्वारा ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र, परिवार एवं समुदाय के बीच सहभागिता को और सुदृढ़ करते हुए बच्चों के पोषण एवं सर्वांगीण विकास के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है।
देवेंद्र कुमार की रिपोर्ट
