बिहार के सियासी गलियारे से आज सोमवार को एक बड़ी खबर सामने आई है। आज विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि उन्होंने सभापति पद को लेकर NDA में चल रही कवायद के तहत ही अपना पद छोड़ा है। यानी एनडीए के गठबंधन धर्म के आलोक में अब इस पद पर जदयू का कोई नेता सभापति पद की जिम्मेदारी संभालेगा। यानी अब राज्य में सीएम और विधानसभा अध्यक्ष पद भाजपा के पास होने की सूरत में सभापति की कुर्सी जेडीयू के खाते में जाने पर सहमति बनी है। आज अवधेश नारायण सिंह ने इस्तीफे के बाद विधान परिषद के कर्मचारियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी कर्मियों का उन्हें हमेशा साथ मिला है।
अवधेश नारायण सिंह का विधान परिषद के सभापति पद पर लंबा कार्यकाल रहा है। अब तक वे रेगुलर और कार्यकारी टर्म को मिलाकर कुल 4 बार इस पद पर आसीन हुए। उन्होंने पहली बार 8 अगस्त 2012 से 8 मई 2017 तक सभापति के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 16 जून 2020 से 25 अगस्त 2022 तक कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली। ततपश्चात तीसरी बार 21 जून 2024 से 23 जुलाई 2024 तक वह कार्यकारी सभापति रहे। इसके बाद फिर 23 जुलाई 2024 से लेकर आज इस्तीफा देने की तारीख यानी 28 सितंबर 2026 तक उन्होंने बिहार विधान परिषद के सभापति के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। इस तरह अलग-अलग कार्यकाल में अवधेश नारायण सिंह लंबे समय तक बिहार विधान परिषद की अध्यक्षीय जिम्मेदारी संभालते रहे हैं।
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे से खाली हुए इस पद पर अब जनता दल यूनाइटेड का नया सभापति बनना तय माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जेडीयू नेता रामबचन राय का नाम इस पद के लिए सबसे आगे चल रहा है। वे बिहार विधान परिषद के नए सभापति बनाए जा सकते हैं। दरअसल, अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे की अटकलें कुछ दिनों से चल रही थी। पिछले दिनों मीडिया में भी यह आया था कि NDA के भीतर संवैधानिक पदों के संतुलन पर सहमति बन गई है। मुख्यमंत्री का पद और विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी बीजेपी के पास होने के बाद विधान परिषद के सभापति पद पर जेडीयू की दावेदारी पर मुहर लगी थी। अब सभापति और उपसभापति दोनों के इस्तीफे के बाद विधान परिषद में आगे की संवैधानिक प्रक्रिया और नई नियुक्तियों पर नजर रहेगी।