नवादा : महाराष्ट्र के डॉक्टरों के परिवार से आने वाले केतन अशोक इंगोले ने MBBS के बाद UPSC पास कर IPS बनने का फैसला किया। जिले के रजौली में पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान उन्होंने 15 घंटे में अपहरण का मामला सुलझाकर अपहृत व्यक्ति को सकुशल छुड़ाया। महाराष्ट्र के एक मेडिकल परिवार में डॉक्टर बनना केतन अशोक इंगोले के लिए सबसे स्वाभाविक रास्ता था। उनके पिता आयुर्वेद डॉक्टर हैं, मां होम्योपैथिक डॉक्टर हैं, बहन MBBS की पढ़ाई कर रही हैं और पत्नी भी MBBS कर चुकी हैं। खुद केतन ने भी सरकारी मेडिकल कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर से MBBS किया, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्टेथोस्कोप के बजाय पुलिस की वर्दी पहनने का फैसला किया।UPSC सिविल सेवा परीक्षा के जरिए वह IPS बने और अब जिले के रजौली में SDPO की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
रजौली उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग है। जिम्मेदारी संभालने के शुरुआती दिनों में ही उनके नेतृत्व में पुलिस ने एक अपहरण मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपहृत व्यक्ति को झारखंड से सकुशल बरामद कर लिया। यह मामला उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग के शुरुआती महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल रहा।
MBBS से IPS तक का सफर:- रजौली के SDPO केतन इंगोले ने पहली बड़ी चुनौती में दिखाई दमदार पुलिसिंग
डॉक्टरों के परिवार से आते हैं केतन
केतन अशोक इंगोले । महाराष्ट्र के वाशिम जिले के रिसोड गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता अशोक इंगोले आयुर्वेद चिकित्सक रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई थी, इसके बाद उन्होंने डॉक्टरी छोड़ दी और अब खेती करते हैं। उनकी मां सुनीता होम्योपैथिक डॉक्टर हैं। यही नहीं, परिवार की मेडिकल परंपरा अगली पीढ़ी में भी जारी है। उनकी बहन केतकी MBBS की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि पत्नी डॉ. साक्षी MBBS की शिक्षा पूरी कर चुकी हैं। ऐसे माहौल में पले-बढ़े केतन ने भी मेडिकल की पढ़ाई को चुना और सरकारी मेडिकल कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर से MBBS की डिग्री हासिल की। केतन 2024 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी हैं। उनका जन्म 23 जून 1997 को हुआ था और उन्होंने 9 दिसंबर 2024 को IPS अधिकारी के रूप में सेवा जॉइन की।
MBBS के बाद IPS क्यों चुना?
MBBS पूरी करने के बाद केतन के सामने डॉक्टर के रूप में करियर बनाने का रास्ता खुला हुआ था। परिवार की पृष्ठभूमि भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी थी बावजूद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। तीसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिली। उनकी ऑल इंडिया रैंक 610 है।
उन्होंने बताया कि MBBS के जरिए लोगों की सेवा करना अपने आप में बड़ा काम है, लेकिन वह प्रशासनिक स्तर पर बड़े दायरे में लोगों के लिए काम करना चाहते थे। उन्हें लगा कि व्यवस्था में बदलाव और प्रशासनिक जिम्मेदारी के जरिए अधिक लोगों तक पहुंचा जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने MBBS के बाद UPSC की तैयारी की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। उनके लिए यह सेवा का रास्ता बदलने का फैसला था, सेवा की भावना का नहीं।
MBBS से IPS तक का सफर
रजौली के SDPO केतन इंगोले ने पहली बड़ी चुनौती में दिखाई दमदार पुलिसिंग, पहली फील्ड पोस्टिंग रजौली में IPS प्रशिक्षण के बाद केतन की पहली फील्ड पोस्टिंग रजौली में हुई। यहां उनके सामने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ झारखंड सीमा से जुड़े क्षेत्रों में पुलिस निगरानी मजबूत करने की जिम्मेदारी है। पदभार संभालने के बाद उन्होंने रजौली थाने का निरीक्षण किया। लंबित मामलों की समीक्षा की और जांच अधिकारियों को इनके निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया। सीमा से लगे इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया।
15 घंटे में सुलझाया अपहरण का पहला बड़ा केस
रजौली में पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान केतन के सामने शुरुआती बड़ी चुनौती अपहरण के मामले के रूप में आई। सिमरकोल इलाके से निर्मल कुमार राय का अपहरण कर उनके बेटे से 80 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। एसपी अभिनव धीमान के निर्देश पर केतन के नेतृत्व में गठित SIT ने CCTV फुटेज, तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया और उसकी निशानदेही पर झारखंड के डोमचांच इलाके में कार्रवाई की। पुलिस की घेराबंदी के बाद अपहर्ता निर्मल राय को छोड़कर फरार हो गया।
मात्र 15 घंटे के भीतर अपहृत व्यक्ति की रिहाई सुनिश्चित कराना उनके लिए बेहद संतोषजनक अनुभव रहा। यह केस उनके लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि रजौली को नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता रहा है और पहली ही फील्ड पोस्टिंग में उन्हें अपहरण जैसे गंभीर मामले की चुनौती का सामना करना पड़ा।
बिहार को बाहर जैसा समझा जाता है, वैसा नहीं
महाराष्ट्र से बिहार आए केतन के लिए यहां काम करना एक नया अनुभव है। बिहार को लेकर बाहर बनी धारणा के बारे में उनका अनुभव अलग रहा है। बिहार के बारे में बाहर काफी नकारात्मक बातें सुनने को मिलती थीं। लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। उनके मुताबिक बिहार अच्छा है और यहां के लोग भी अच्छे स्वभाव के हैं। उन्हें बिहार में काम करना अच्छा लग रहा है और लोगों के बीच रहकर सेवा करने में आनंद आ रहा है। केतन के अनुसार, बाहर से बिहार को जिस नजर से देखा जाता है, जमीनी स्तर पर काम करते हुए उन्हें वैसा अनुभव नहीं हुआ। यहां का माहौल उन्हें सकारात्मक महसूस होता है।
मेडिकल से पुलिसिंग तक का सफर
डॉ. केतन अशोक इंगोले की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि उनकी शैक्षणिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि पूरी तरह चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी रही, लेकिन उन्होंने अपने लिए पुलिस सेवा का रास्ता चुना। MBBS के बाद UPSC की तैयारी और फिर IPS में चयन ने उनके करियर की दिशा बदल दी। अब रजौली में उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग उन्हें जमीनी स्तर पर पुलिसिंग की जिम्मेदारियां निभाने का अवसर दे रही है। शुरुआत में ही उन्हें अपहरण जैसे गंभीर मामले का सामना करना पड़ा इसके साथ-साथ लंबित मामलों का निष्पादन, बेहतर अनुसंधान और झारखंड सीमा से लगे क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करना उनकी शुरुआती प्राथमिकताओं में शामिल है।
केतन अशोक इंगोले का पारिवारिक परिचय
नाम: केतन अशोक इंगोले
सेवा: भारतीय पुलिस सेवा (IPS)
बैच: 2024
कैडर: बिहार
जन्म: 23 जून 1997
गृह राज्य: महाराष्ट्र
मूल स्थान: रिसोड, वाशिम (महाराष्ट्र)
शिक्षा: MBBS, सरकारी मेडिकल कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर
IPS जॉइनिंग: 9 दिसंबर 2024
वर्तमान जिम्मेदारी: SDPO, रजौली (नवादा)
पिता: अशोक इंगोले, पूर्व आयुर्वेद चिकित्सक, वर्तमान में किसान
मां: सुनीता इंगोले, होम्योपैथिक चिकित्सक
बहन: केतकी इंगोले, MBBS छात्रा
पत्नी: डॉ. साक्षी इंगोले, MBBS
भईया जी की रिपोर्ट