नवादा : जैन समाज के महान पर्व पर्युषण महापर्व काअनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर विधि-विधान और हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ। मनोज जैन ने बताया कि भाद्रपद मास की पंचमी तिथि से शुरू हुए 10 दिवसीय धार्मिक पर्व के दौरान जैन समाज के लोगों ने भगवान महावीर के बताये 10 धर्मों उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन व ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। 10 दिनों तक अस्पताल रोड स्थित जैन मंदिर में सुबह पूजा-अर्चना, अभिषेक व धार्मिक अनुष्ठान हुए।
वहीं, शाम को आरती, भजन, शास्त्र पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। अनंत चतुर्दशी के दिन जैन समाज के तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य के निर्वाण दिवस के रूप में विशेष पूजा-अर्चना की गयी। मान्यता के अनुसार, भगवान वासुपूज्य का निर्वाण बिहार के भागलपुर जिले के चंपापुर में हुआ था। इस अवसर पर नवादा जैन मंदिर में भगवान वासुपूज्य को निर्वाण लडू चढ़ाया गया। पूजा-अर्चना के बाद जैन समाज के लोग गुनावां स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे जहां भगवान का अभिषेक, पूजा-पाठ और निर्वाण लडू चढ़ाने का कार्यक्रम हुआ।
नवादा जैन मंदिर में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। 48 दीपों से भक्तामर जी की आरती की गयी। इसके बाद नमोकार चालीसा का पाठ हुआ। सांस्कृतिक संध्या में जैन समाज के बच्चों और युवाओं ने भजन प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जैन समाज नवादा की कार्यकारिणी समिति, जैन युवा संगठन, जैन महिला मिलन और जैन बहू मिलन की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
भईया जी की रिपोर्ट