नवादा : बिहार पंचायत सेवा संघ के आह्वान जिले के पंचायत राज पदाधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर सरकारी कार्यों का निष्पादन किया। संघ ने वर्षों से लंबित मांगों के समर्थन में 14 और 15 सितंबर को दो दिनों तक काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध का निर्णय लिया है। इसके बाद भी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर पूरे बिहार के पंचायत सेवा संवर्ग के पदाधिकारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है।
पंचायत राज विभाग, बिहार सरकार के सचिव को भेजे गए संघ के पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2010 में बिहार पंचायत सेवा संवर्ग के गठन के बाद से पदाधिकारी पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए लगातार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। संघ का कहना है कि समय के साथ विभागीय कार्य और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ीं, लेकिन इसके अनुरूप संवर्ग को प्रशासनिक शक्तियां, संसाधन, सुविधाएं और सेवा संबंधी लाभ नहीं मिल सका।
संघ ने पत्र में विभागीय कार्यों में गैर-विभागीय हस्तक्षेप, कर्मियों पर स्पष्ट प्रशासनिक नियंत्रण नहीं होने, पदोन्नति और कैडर से जुड़ी विसंगतियों तथा वेतन संबंधी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताया है। संघ के अनुसार इन समस्याओं को लेकर वर्षों से विभाग को पत्राचार, वार्ता और अनुरोध के माध्यम से अवगत कराया जाता रहा है, लेकिन अधिकांश मांगों पर अपेक्षित ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संघ की प्रमुख मांगों में प्रखंड स्तरीय विभागीय पदाधिकारी के पद को राजपत्रित घोषित कर वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां देने की मांग शामिल है।
इसके साथ ही प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में नामित करने, वेतन विसंगतियां दूर करने, कैडर का पुनर्गठन करने और लंबित प्रोन्नति मामलों का शीघ्र निष्पादन करने की मांग की है। संघ ने ACEO/ADPRO पदों से संबंधित विभागीय पत्रों को धरातल पर लागू कराने के साथ ADPRO को कार्यालय, वाहन और पंचायत निरीक्षण की सुविधा देने की मांग रखी है। विभागीय पदाधिकारियों को कार्यों के निर्वहन के लिए पर्याप्त प्रशासनिक एवं कार्यात्मक स्वतंत्रता तथा विभागीय कर्मियों पर एकल प्रशासनिक नियंत्रण देने की मांग की गई है।
इसके अलावा प्रत्येक प्रखंड पंचायत राज कार्यालय में एक उच्च वर्गीय लिपिक, एक निम्न वर्गीय लिपिक और एक अनुसेवक की पदस्थापना तथा अलग से कार्यालय व्यय की व्यवस्था करने की मांग भी पत्र में की गई है। संघ ने कहा है कि सरकार और विभाग यदि वार्ता के माध्यम से मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल करते हैं तो सामूहिक अवकाश सहित प्रस्तावित अन्य कार्यक्रमों को स्थगित करने पर विचार किया जाएगा। सोमवार को काली पट्टी बांधकर कार्य करना इसी चरणबद्ध आंदोलन का हिस्सा रहा।
भईया जी की रिपोर्ट