– माल किसी और का फंसा रहे किसी और को! इसे कहते हैं थानेदारी?
नवादा : थाना व दारोगा नाम से एक कहावत प्रचलित है।” दा! रो के, चाहे गा के” जबकि थाना के लिए ” नहीं दिया तो थाना? दें दिया तो, नाथा” दोनों कहानियां रजौली थानेदार पर सटीक बैठती है। तभी तो कहा जाता है ” थानेदारी करना कोई रजौली थानेदार से सीखे।बिहार-झारखंड सीमा पर अवस्थित रजौली थाना अवैध खनन, बालू व शराब के लिए जाना जाता है।

जंगल व पहाड़ी क्षेत्रों से घिरे होने के कारण अवैध कार्य में संलिप्त माफियाओं के लिए सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। जाहिर है बगैर थानेदार की मिलीभगत से कोई अवैध कार्य संभव नहीं। सो माफियाओं को संरक्षण देना थानेदार का काम है।बिहार में शराब बंदी लागू है बावजूद झारखंड राज्य से शराब की बड़ी बड़ी खेप रजौली के रास्ते बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार आ रही है। ऐसी भी बात नहीं कि जानकारी आला अधिकारियों को नहीं है।जब शराब की बात हो और जंगली व पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध शराब का निर्माण व बिक्री न हो ऐसा भला हो सकता है क्या? सो यह भी धड़ल्ले से हो रहा है।
अब आइए मुद्दे की बात करते हैं। इन कार्यों के लिए माफियाओं की जबर्दस्त सक्रियता है। जब माफियाओं की सक्रियता हो और बर्चस्व की लड़ाई न हो भला ऐसा हो सकता है क्या? सो बर्चस्व की लड़ाई में फंसने फंसाने का खेल जारी है। इसके लिए थानेदार की सहमति आवश्यक है। जिसकी जैसी बोली उसकी वैसी तरफदारी। सो खेल चालू है। थानेदार को बदनामी से बचना है सो थानेदार संरक्षित माफियाओं के इशारे पर कुछ शराब बरामद कर अधिकारियों की बाहवाही लूटने का काम किया जा रहा है। अगर बरामद हुआ सौ लीटर तो संरक्षित माफियाओं तस्करों की शराब की खेप आ गयी दस हजार लीटर।
आश्चर्य यह कि अगर ग़लती से संरक्षित शराब माफिया का देसी विदेशी शराब बरामद हो गया तो थानेदार की बेचैनी बढ़ जाती है। छापामार दल को निर्देश दिया जाता है कि प्राथमिकी में संरक्षित शराब माफिया द्वारा बताए गए व्यक्ति को नामजद अभियुक्त बना दिया जाय और होता है भी वही “हाल महाराज का, मिर्जा खेले होली”। कुछ इसी प्रकार का आडियो-वीडियो इसकी पुष्टि कर रहा है जो दर्ज प्राथमिकी से मेल नहीं खाता। वैसे मैं वायरल आडियो-वीडियो की पुष्टि नहीं करता। लेकिन जो प्रमाण मिल रहे हैं उसकी विस्तार से जांच की आवश्यकता है। अब पुलिस के आला अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि की वायरल आडियो-वीडियो की जांच कर सत्यापन कर दोषी पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करती है या फिर इसे भी रद्दी की टोकरी में डाल देती है?

भईया जी की रिपोर्ट
