नवादा : जिले के नारदीगंज प्रखंड क्षेत्र में गंगा उद्धव योजना को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मधुबन और मोतनाजे गांवों की करीब एक हजार बीघा जमीन इस योजना की जद में आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार भूमि अधिग्रहण से करीब तीन हजार परिवार प्रभावित होंगे। अपनी जमीन और आजीविका बचाने की मांग को लेकर ग्रामीण लगातार विरोध जता रहे हैं।
इसी क्रम में किसान महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण शामिल हुए। महापंचायत में किसानों ने कहा कि उनकी जमीन उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है। पीढ़ियों से खेती कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले किसानों के सामने भूमि अधिग्रहण के कारण भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाओं का वे विरोध नहीं करते, लेकिन विकास के नाम पर किसानों को उनकी उपजाऊ भूमि से बेदखल करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन और सरकार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने तथा प्रभावित किसानों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की। महापंचायत को संबोधित करते हुए मौके पर मौजूद अतिथियों ने किसानों के पक्ष में आवाज बुलंद की। जल संरक्षण के क्षेत्र में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह जी ने कहा कि किसानों को उनकी भूमि से बेदखल करना किसी भी नीति और नियम के तहत उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों और उनकी जमीन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसानों की सहमति और उनके हितों को ध्यान में रखकर ही किसी भी विकास योजना को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। कार्यक्रम में अबुलास अहमद, सुधाकर सिंह, बक्सर सांसद एवं किसान नेता, दिनेश सिंह, भारतीय किसान संघ के बिहार अध्यक्ष तथा अशोक कुमार सिंह, बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती। उन्होंने ग्रामीणों की एकजुटता की सराहना करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने की बात कही। महापंचायत में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों ने सरकार और प्रशासन से मामले में जल्द पहल करने तथा प्रभावित परिवारों के हित में उचित निर्णय लेने की मांग की। महापंचायत के दौरान ग्रामीणों में भूमि अधिग्रहण को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।
भईया जी की रिपोर्ट