-02 अक्टूबर से लागू होगी नयी व्यवस्था
नवादा : जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी, मनमानी कीमत और कृत्रिम किल्लत अब जिले के किसानों को नहीं झेलनी पड़ेगी। जिले में खाद वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए एक बड़े डिजिटल बदलाव की तैयारी है। अब किसानों को यूरिया और डीएपी जैसी खाद खरीदने के लिए अपनी चेहरे की पहचान यानी फेस रिकग्निशन के जरिए सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। यह नई व्यवस्था आगामी 02 अक्टूबर से पूरे जिले में प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी।
खाद बिक्री की प्रक्रिया में बदलाव
कृषि निदेशक द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया के तहत, खाद बिक्री की पूरी प्रक्रिया को अब डिजिटल निगरानी में लाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बिचौलियों पर नकेल कसना, फर्जी खरीद को रोकना और जरूरतमंद किसानों तक निर्धारित दर पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जिला कृषि पदाधिकारी अजीत प्रकाश ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी दुकानदार या विक्रेता मनमाने तरीके से खाद की बिक्री नहीं कर सकेगा। खाद की बिक्री और वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए कई कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। चेहरे से पहचान को पुख्ता तौर पर लागू किया जाएगा।
खाद खरीदने के दौरान किसान का मौके पर ही चेहरे के जरिए डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन सफल होने के बाद ही बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद, फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल अर्थात एफएफएस ऐप पर ऑनलाइन एंट्री की जाएगी। उर्वरक बिक्री की रूपरेखा ऐप पर हर बिक्री का पूरा विवरण तुरंत दर्ज होगा। इसमें किसान का नाम, खरीदी गई खाद की मात्रा और समय का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा। इसके साथ ही, बिक्री केंद्र की लोकेशन ट्रैकिंग भी होगा।केवल किसान ही नहीं, बल्कि खाद बिक्री केंद्र की वास्तविक भौगोलिक स्थिति अक्षांश और देशांतर भी ऐप पर दर्ज की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि खाद की बिक्री अधिकृत दुकान या केंद्र से ही हो रही है, किसी गुप्त गोदाम से नहीं।
आवश्यकता आधारित आवंटन पर रहेगा जोर
डीएओ ने बताया कि किसान को उसकी वास्तविक कृषि भूमि और फसल की सामान्य उर्वरक अनुशंसा के आधार पर ही खाद की मात्रा उपलब्ध कराई जाएगी। इन सारी नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने को लेकर कृषि अधिकारियों की सख्त निगरानी रहेगी। जिला एवं प्रखंड स्तर के कृषि अधिकारी ऐप पर दर्ज डेटा की नियमित जांच करेंगे और संदिग्ध बिक्री पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।
कालाबाजारी पर नियंत्रण
मनमानी कीमत और कालाबाजारी से मिलेगी मुक्ति नवादा जिले में यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी पर नई व्यवस्था से पूरी तरह से लगाम लगने की संभावना है। किसानों का सामान्य आरोप रहता है कि सरकार द्वारा यूरिया की प्रति बोरी निर्धारित दर 266.50 रुपये तय की गई है, लेकिन पीक सीजन में दुकानों पर इसके लिए 400 से 450 रुपये तक वसूले जाते हैं। डीएपी की बिक्री में भी इसी तरह की मनमानी देखने को मिलती है। पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद दुकानों पर नो स्टॉक का बोर्ड लगाकर 1200 रुपये के डीएपी के लिए 1500 रुपये या इससे भी अधिक राशि वसूल ली जाती है। डिजिटल सत्यापन की इस नई तकनीक से फर्जी आधार या अन्य दस्तावेजों के सहारे भारी मात्रा में खाद उठाकर कालाबाजारी करने वाले गिरोह पर सीधा प्रहार होगा। जब तक असली किसान का चेहरा ऐप से सत्यापित नहीं होगा, तब तक खाद का बिल ही नहीं कटेगा।
कहते हैं अधिकारी
किसानों को खाद बिक्री केंद्र पर जाकर विक्रेता को अपनी जानकारी देनी होगी। मोबाइल ऐप या डिजिटल डिवाइस के कैमरे के सामने अपनी चेहरे की पहचान यानी सत्यापन करानी होगी। सत्यापन पूरा होते ही किसान की जरूरत के अनुसार अनुशंसित मात्रा में खाद आवंटित कर दी जाएगी। बिक्री की रसीद और विवरण तुरंत एफएफएस ऐप के जरिए केंद्रीय डेटाबेस में दर्ज हो जाएगा। यह व्यवस्था किसानों के लिए काफी कारगर साबित होगी। -अजीत प्रकाश, जिला कृषि पदाधिकारी, नवादा:
प्रशासनिक मुस्तैदी से जग गई उम्मीद की नई किरण
जिला कृषि कार्यालय इस नई व्यवस्था को आगामी 02 अक्टूबर से पूरी तरह लागू करने की तैयारियों में जुट गया है। विक्रेताओं को एफएफएस ऐप के इस्तेमाल और फेस रिकग्निशन डिवाइस के संचालन के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। डीएओ ने बताया कि बिक्री केंद्र की सटीक लोकेशन दर्ज होने से यदि कोई विक्रेता निर्धारित स्थान के अलावा कहीं और से खाद बेचता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा। इससे अवैध भंडारण और तस्करी पर पूरी तरह रोक लगेगी। कृषि विभाग का मानना है कि इस कदम से जिले के हर छोटे-बड़े किसान को सही समय पर, सही दाम में और बिना किसी परेशानी के उर्वरक मिल सकेगा।
भईया जी की रिपोर्ट