नवादा : एक ओर सरकार शिक्षा में सुधार और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के रजौली प्रखंड के अमावां बाजार स्थित प्राथमिक विद्यालय कन्या उर्दू की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। प्रशासनिक उदासीनता और विभागीय लापरवाही के कारण विद्यालय में पढ़ने वाली 73 मासूम बच्चियों और 5 महिला शिक्षिकाओं का रोज स्कूल आना किसी सजा से कम नहीं। 
चारों तरफ नाली, बीच में स्कूल, सालों भर जलजमाव का दंश
विद्यालय की सबसे बड़ी समस्या जलजमाव है। विद्यालय भवन चारों ओर से मोहल्ले की नालियों से घिरा है। दो तरफ से मोहल्ले का गंदा पानी सीधे विद्यालय परिसर में आकर जमा हो जाता है, जबकि दो तरफ सरकारी नालियों का पानी जमा है जो अब सड़कर दलदल बन चुका है। पूरे वर्ष परिसर में घुटने भर तक गंदा, बदबूदार पानी लगा रहता है। यही दुर्गंध पूरे इलाके में फैलती है और जलजनित बीमारियों को न्योता दे रही है।
दो कमरों में सिमटा पूरा विद्यालय
कहने को विद्यालय के पास कुल तीन कमरे हैं, जिसमें दो कमरों में कक्षा 1 से 5 तक के 73 बच्चों की पढ़ाई होती है और तीसरा कमरा रसोईघर बना हुआ है। विद्यालय का अपना कोई कार्यालय तक नहीं है। शौचालय के नाम पर तीन बाथरूम हैं, जिसमें एक शिक्षिकाओं के लिए और दो छात्राओं के लिए है। बाउंड्रीवॉल नहीं होने से विद्यालय परिसर पूरी तरह असुरक्षित है।
बच्चियों की जुबानी :- नाली में डूबकर आते हैं स्कूल
विद्यालय की दुर्दशा का अंदाजा बच्चों की बातों से लगाया जा सकता है। कक्षा 4 की छात्रा आस्मिन परवीन ने बताया कि जब बारिश होती है तो पूरे रास्ते और स्कूल में नाली का पानी भर जाता है। कपड़े गंदे हो जाते हैं, फिर भी इसी पानी में डूबकर स्कूल आना पड़ता है। डर लगता है कहीं गिर न जाएं। सांप-बिच्छू न निकल आए। कक्षा 2 की मासूम मायरा तस्लीम ने कहा कि बहुत बदबू आती है , पढ़ने में मन नहीं लगता। उल्टी जैसा लगता है। हमको भी दूसरे स्कूल जैसा सुंदर, साफ स्कूल चाहिए।
शिक्षिकाएं भी बेहाल, कुत्ते-बकरियों का जमावड़ा
बाउंड्रीवॉल नहीं होने का खामियाजा शिक्षिकाओं को भी भुगतना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापिका पिंकी कुमारी ने बताया कि बाउंड्री नहीं होने से दिन भर आवारा कुत्ते, बकरियां, मुर्गियां और मोहल्ले के असामाजिक तत्व परिसर में घुस आते हैं। मध्याह्न भोजन के समय तो बच्चों के थाली तक में मुंह मार देते हैं. कक्षा में घुस जाते हैं। हम महिला शिक्षिकाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
उन्होंने बताया कि बारिश में कक्षाओं में पानी घुसने से बेंच-डेस्क खराब हो रहे हैं, किताबें भीग जाती हैं और पठन-पाठन पूरी तरह बाधित हो जाता है। कई बार परिसर में जहरीले कीड़े और जलीय जीव निकल आते हैं, जिससे बच्चों की जान को खतरा रहता है। शिक्षिकाओं तरन्नुम परवीन, कविता कुमारी चौधरी, रिजवाना शाहीन और नीलोफर ने बताया कि दुर्गंध और गंदगी के कारण बच्चे अक्सर बीमार पड़ते हैं, चर्म रोग और डायरिया आम बात हो गई है।
कई बार पत्राचार, फिर भी नहीं हुआ समस्या का समाधान
विद्यालय प्रबंधन इस समस्या को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है। प्रधानाध्यापिका द्वारा कई बार लिखित रूप से विभागीय अधिकारियों को पत्राचार किया गया। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में जाकर विद्यालय की स्थिति से अवगत कराकर बाउंड्रीवॉल निर्माण और जल निकासी की मांग कर चुकी हैं।
इस संबंध में प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल विभाग के स्तर से हल नहीं होगी, इसके लिए स्थानीय लोगों और पंचायत के सहयोग से पानी निकासी का स्थायी समाधान निकालना होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही स्थल निरीक्षण कर विद्यालय परिसर को दुरुस्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
भईया जी की रिपोर्ट
