अरवल – जिला पदाधिकारी अरवल अमृषा बैंस के निदेशानुसार जिले में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बालिकाओं को उनके अधिकारों सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिला सशक्तिकरण कार्यालय एवं वन स्टॉप सेंटर, अरवल के संयुक्त तत्वावधान में प्राथमिक विद्यालय मल्हीपट्टी, अरवल में कक्षा 3 से 5 तक की छात्राओं के साथ सखी वार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक शिम्पू कुमारी, मनो-सामाजिक परामर्शी प्रिया कुमारी एवं जिला हब की वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ कविता सिंह द्वारा छात्राओं के साथ संवाद करते हुए उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
सखी वार्ता के दौरान बच्चियों को गुड टच एवं बैड टच व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल विवाह, बाल श्रम, यौन उत्पीड़न तथा बालिकाओं के अधिकारों के संबंध में जागरूक किया गया। बच्चियों को बताया गया कि उन्हें अपने शरीर एवं व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति सजग रहना चाहिए। किसी भी व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से छूने, डराने धमकाने अथवा किसी अन्य प्रकार की अनुचित हरकत किए जाने पर चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसकी जानकारी तत्काल अपने माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को देनी चाहिए। कार्यक्रम में बाल विवाह के दुष्परिणामों पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। छात्राओं को बताया गया कि 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह बालिकाओं के शिक्षा एवं विकास के अवसरों को
प्रभावित करता है। कम उम्र में विवाह से पढ़ाई छूटने, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, कुपोषण तथा कम उम्र में गर्भधारण एवं प्रसव के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ने की संभावना रहती है। इसलिए बालिकाओं को अपनी पढ़ाई पूरी करने, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा बाल विवाह का विरोध करने के लिए प्रेरित किया गया। इसी क्रम में बाल श्रम से होने वाले नुकसान के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चियों को बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा एवं स्वस्थ वातावरण में विकास का अधिकार है। किसी भी बच्चे को श्रम के लिए बाध्य करना उसके अधिकारों का उल्लंघन है। छात्राओं को अपने आसपास बाल श्रम अथवा बाल विवाह जैसी किसी भी घटना की जानकारी मिलने पर इसकी सूचना जिम्मेदार व्यक्ति अथवा संबंधित पदाधिकारी को देने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चियों के साथ संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उन्हें सुरक्षित, शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया। छात्राओं को यह संदेश दिया गया कि जागरूकता और शिक्षा ही उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करने तथा भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सशक्त बनाती है।
इस अवसर पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी,आईसीडीएस-सह-नोडल पदाधिकारी, महिला एवं बाल विकास निगम, अरवल माला कुमारी ने कहा कि सखी वार्ता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि बेटियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा एवं उपलब्ध सहायता तंत्र के बारे में जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। बालिकाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और किसी भी प्रकार की असुरक्षा अथवा उत्पीड़न की स्थिति में बिना किसी भय के आवाज उठाएं यही इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने तथा उन्हें सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा जिले की बालिकाओं एवं महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए विभिन्न स्तरों पर जागरूकता एवं सहयोगात्मक गतिविधियों का आयोजन निरंतर जारी है।
देवेंद्र कुमार की रिपोर्ट