बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के आज पांचवें और आखिरी दिन छात्रों के आंदोलन के मुद्दे पर पक्ष के विपक्ष में जोरदार भिड़ंत हो गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने जोरदार हंगामा करना शुरू कर दिया। कार्यवाही शुरू होने के करीब सात मिनट के भीतर ही शोर-शराबे और नारेबाजी के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही की शुरुआत में राजद विधायक आलोक मेहता ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित फायरिंग और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा। इस पर भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया गया था। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद कई विधायक वेल में पहुंच गए, जिससे सदन में हंगामा बढ़ गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को 12:00 तक के लिए स्थगित कर दिया।
दरअसल, आज सदन की शुरुआत के साथ ही विपक्षी विधायकों ने छात्र आन्दोलन पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। राजद के आलोक मेहता ने आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे छात्रों का दमन करते हुए उन्हें दौड़ा—दौड़ा कर पीटा। इसपर सत्ताधारी जदयू और भाजपा के विधायकों ने विरोध किया और कहा कि आंदोलन की आड़ में ये लोग गुंडागर्दी और बलवा कर रहे हैं। आम लोगों को इन लोगों ने सरेआम पीटा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी शुरू हो गयी। इसी सबके बीच विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और नारे लगाने लगे। हांगामा बढ़ता देख स्पीकर ने 12 बजे दिन तक के लिए सदन को स्थगित कर दिया।
उधर आज बिहार विधान परिषद में इंजीनियरिंग कॉलेज की खराब गुणवत्ता पर विपक्ष ने सवाल उठाया। इस पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने तंज कसा कि योलोग क्या कहेंगे? यह लोग चरवाहा विद्यालय चलाने वाले लोग हैं। मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि तब यह लोग कहां थे जब राज्य में चरवाहा विद्यालय का संचालन हो रहा था? इस पर राजद एमएलसी सुनील कुमार सिंह ने पलटवार किया। जबकि राजद MLC सौरभ कुमार ने कहा कि राज्य के 36 इंजीनियरिंग कॉलेज को NBA से मान्यता नहीं है। इसके कारण छात्रों का प्लेसमेंट ठीक से नहीं हो पा रहा है। पिछले साल मात्र 5000 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ। इतना ही नहीं इन कॉलेजों ने मानकों के अनुरूप पढ़ाई नहीं हो रही और, न ही यहां पर मानक के अनुरूप शिक्षक भी नहीं हैं।