लोक के परिष्कार से तंत्र सुरक्षित : सुनील आंबेकर
पटना: जेपी आंदोलन का सूत्रपात पटना की धरती से हुआ और संपूर्ण क्रांति की पूरी प्रकल्पना का केंद्र बिहार रहा, इसमें कोई दो राय नहीं है। प्रधानमंत्री पद को लेकर इंदिरा गांधी की लिप्सा ही एकमात्र सबसे बड़ा कारण है देश में राष्ट्रीय आपातकाल लगने का। उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार पदभूषण राम बहादुर राय ने बुधवार को कहीं। चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान में हिंदुस्थान समाचार द्वारा आयोजित ‘इमरजेंसी के 50 साल’ कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। विषय था— बिहार आंदोलन और आपातकाल।
उन्होंने आपातकाल लगने की पृष्ठभूमि की तारीख दर तारीख वर्णन करते हुए जेपी आंदोलन के बारे में बताया और कहा कि इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही कि 1955 में सक्रिय राजनीति छोड़ चुके जयप्रकाश नारायण का राजनीति में पुनः आगमन। इंदिरा गांधी की निरंकुश शासन और आपातकाल के खिलाफ जारी संपूर्ण क्रांति की नीतिगत रूपरेखा तैयार करने में सबसे बड़ा योगदान किसी का है तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंचालक रहे बाला साहब देवरस का है। आपातकाल लगने के 6 महीने पूर्व इंदिरा गांधी के बयानों से लगने लगा था कि वह तानाशाही की ओर बढ़ सकती हैं, तो 8 जनवरी 1975 को लखनऊ में प्रेस वार्ता कर बालासाहब देवरस ने इंदिरा गांधी को चुनौती दी थी और आपातकाल लगने के ठीक 11 दिन पूर्व यानी 14 जून 1975 को भी उन्होंने दिल्ली में अपने संकल्प को दोहराया था। जेपी आंदोलन को व्यापक स्वरूप व गति देने में आरएसएस, जनसंघ और रामनाथ गोयनका के उल्लेख के बिना संपूर्ण क्रांति का अध्याय अपूर्ण रहेगा।
जेपी आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार रहे राम बहादुर राय ने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार के विरुद्ध इंदिरा सरकार के विरुद्ध लोगों के मन में आक्रोश था और लोग मानस का मन आंदोलन के लिए तैयार हो रहा था फिर भी आपातकाल लगने के पीछे इसे बड़ी वजह नहीं मानी जाती बल्कि 11 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा द्वारा इंदिरा गांधी के खिलाफ दिया गया वह निर्णय था, जिसमें प्रधानमंत्री को अपना पद छोड़ना था। इस निर्णय के उलट इंदिरा जी इस्तीफा नहीं देना चाहती थीं और उनकी इसी जिद और लिप्स के कारण देश पर 25 जून 1975 को आपातकाल थोपा गया।
समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत में लोक का परिष्कार होना बहुत आवश्यक है, क्योंकि अगर लोक ठीक रहेगा तो बिगड़ते हुए तंत्र को भी सुधार लेगा। उन्होंने कहा कि आपातकाल के 50 वर्ष से अधिक हो गए हैं फिर भी इस दिन का स्मरण हर आने वाली पीढ़ी को करना चाहिए, ताकि यह पता रहे कि तानाशाही के विरुद्ध लोक अगर जागृत होगा, तो हर हालत में तानाशाही को नष्ट होना होगा। विश्व के दूसरे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक बार जहां तानाशाही शुरू हो जाती है वहां कई दशक तक जारी रहती है। भारत में 21 महीने के अंदर ही आपातकाल का समाप्त हो गया। इसके पीछे भारत के समाज की जीवंत शक्ति है। ”हर सुधार राजनीति के द्वारा ही हो सकता है”— यह विचार पश्चिम के चिंतन में है, जबकि भारत का चिंतन कहता है कि समाज अगर सुसंस्कृत व सुगठित होगा तो कल्याणकारी राजनीति का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
बिहार सरकार के खनन तथा कला-संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कार्यक्रम में उपस्थित जेपी सेनानियों को शॉल देकर सम्मानित किया और कहा कि यहां उपस्थित जेपी सेनानी तानाशाही के विरुद्ध जलती हुई मशाल के जीवंत उदाहरण हैं और यह हम सब का सौभाग्य है कि हम सब के बीच में वे आज सदेह उपस्थित हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने आपातकाल से पहले 1967 में बिहार में बनी पहली गैर कांग्रेसी सरकार और जेपी आंदोलन के शुरुआती दिनों में पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ की सक्रियता के बारे में विस्तार से बताया। इसी क्रम में उन्होंने जेपी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने में राम बहादुर राय की भूमिका की भी चर्चा की।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी हरेंद्र प्रताप ने जेपी आंदोलन की प्रासंगिकता को याद किया और चिंता व्यक्त की कि जिस उद्देश्य के साथ जेपी आंदोलन हुआ और उससे निकले लोग जब बड़े कद के नेता हुए तो फिर से इस भ्रष्टाचार में डूब गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिंदुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविंद मार्डिकर ने समाचार एजेंसी के 1948 से शुरू हुई यात्रा का वृतांत सुनाया और आपातकाल के दौरान इस न्यूज़ एजेंसी की गतिविधियों को साझा किया।
चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कुमोद कुमार ने आगत अतिथियों का स्वागत किया और हिंदुस्थान समाचार के सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित, समाज कल्याण और युवाओं से संबंधित रोजगार उन्मुखी कार्यक्रमों के लिए यह संस्थान हमेशा तत्पर रहता है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक रामनवमी जी, क्षेत्र कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह, क्षेत्र प्रचार प्रमुख राजेश पांडेय, समाजसेवी पद्मश्री विमल कुमार जैन, बीपीएससी सदस्य प्रो. अरुण भगत, जेपी सेनानी व वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र मिश्र, लव कुमार मिश्र, पूर्व विधान पार्षद किरण घई समेत पत्रकार, समाजसेवी, शिक्षक, छात्र व अन्य बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।