बिहार सरकार की स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बीते दिन पटना में विवादों में रहे ठेकेदार रिशु श्री के ठिकानों पर छापेमारी के बाद आज गुरुवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। छापेमारी में रिशु श्री के ठिकानों से भारी मात्रा में हीरे, सोने और चांदी के जेवरात और नोटों के बंडल बरामद हुए जिसके बाद SVU ने ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी सरकारी टेंडरों में हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में हुई है। बीती देर रात SVU की टीम ठेकेदार रिशु श्री के मीठापुर स्थित आवास पर पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उन्हें विशेष निगरानी इकाई दफ्तर ले जाया गया जहां देर रात तक उनसे कड़ी पूछताछ की गई। SVU का कहना है कि टीम के पास रिशु श्री के खिलाफ पक्के सबूत हैं जिनके आधार पर आगे की पूछताछ की जा रही है।
रडार पर कई IAS, प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
सूत्रों के मुताबिक, ठेकेदार पर सरकारी टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी कर अपनी कंपनी को गलत तरीके से बड़ा मुनाफा पहुंचाने का आरोप है। इससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान होने की बात कही जा रही है। जानकारी के अनुसार छापेमारी के दौरान उसके ठिकाने के सवा किलो सोना-चांदी और हीरा के साथ लाखों कैश बरामद किए गए। कई आईएएस अधिकारियों से उसका करीबी संबंध है जिन्हें रिशु ने अनुचित लाभ पहुंचाया। बताया गया कि एसवीयू की रडार पर ऐसे सभी आईएएस अधिकारी आ गए हैं। सूत्रों ने बताया कि अब SVU ठेकेदार रिशु श्री की 68 करोड़ की संपत्ति को अटैच करने की तैयारी कर रही है।
घर से भारी मात्रा में जेवरात और कैश बरामद
विदित हो कि ठेकेदार रिशु श्री के खिलाफ SVU में सरकारी टेंडरों में गोलमाल का मामला दर्ज किया गया था। इसी सिलसिले में जांच पूरी होने के बाद अब SVU की टीम ने पटना के मीठापुर स्थित उनके आवास पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान जब टीम सुबह-सुबह पहुंची तो इलाके में हड़कंप मच गया। अब तक की कार्रवाई में भारी मात्रा में हीरे, सोने और चांदी के करीब 2 करोड़ के कीमती जेवरात तथा नोटों के बंडल बरामद किए गए हैं। मौके से मिले दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी कर उनकी कंपनी को फर्जी तरीके से भारी मुनाफा पहुंचाया गया, जिससे सरकार को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल SVU की टीम बरामद नकदी और आभूषणों का मिलान और जांच कर रही है। ठेकेदार रिशु श्री पर आरोप है कि उन्होंने अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की। प्रारंभिक जांच में इससे जुड़े कुछ साक्ष्य भी सामने आए हैं, जिनके आधार पर यह संकेत मिलता है कि निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं के जरिए उन्होंने आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया।