बिहार में पुलों की दुर्दशा ने राज्य में बुनियादी ढांचे के निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है। ताजा मामला गयाजी का है जहां 64 करोड़ रुपये की लागत से बने केनी पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुल में बाहर निकले लोहे के सरिये और टूटे खंभों को देखकर उसके गिरने की आशंका बढ़ गई है। पुल की बिगड़ती हालत से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। इस पुल के टूटे हिस्सों और बाहर निकले सरियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। यह पुल बिहार के विधानसभा अध्यक्ष और गयाजी के विधायक प्रेम कुमार के इलाके में आता है। जब उनसे इसकी दुर्दशा को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामले को सड़क निर्माण विभाग के संज्ञान में ला दिया गया है। विभाग ने जांच शुरू कर दी है और पूरे राज्य में पुलों का निरीक्षण कराया जा रहा है।
बिहार में पुलों के ऑडिट के आदेश
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि इस संबंध में सड़क निर्माण विभाग को सूचित कर दिया गया है। विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा पूरे राज्य में सभी पुलों का निरीक्षण किया जा रहा है। पुलों की मौजूदा स्थिति और उनके संरचनात्मक जीवनकाल का आकलन किया जा रहा है। विभिन्न जिलों से भी इस तरह की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। गयाजी में केनी पुल की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि सिलाव में भी एक पुल के नींव के खंभे के अलग हो जाने की बात सामने आई है। शीघ्र ही इन सभी पुलों की मरम्मत कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
ऐसी सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
अनियमितता मिली तो कार्रवाई
प्रेम कुमार ने बताया कि सरकार राज्य के सभी पुलों का ऑडिट और व्यापक निरीक्षण करवा रही है। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए इन मुद्दों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है और यह साबित होता है कि पुल का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं किया गया था, तो सरकार संबंधित जिम्मेदार इंजीनियरों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता और उनके रखरखाव के मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।