-आखिर जिले के अधिकारी क्यों बचाना चाहते हैं फर्जी पीडीएस विक्रेता को
-आरटीआई कार्यकर्ता ने मुख्य सचिव से पूछा सवाल
नवादा : जिले में जनवितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार है। जी हां! ऐसा मैं नहीं तमाम उपलब्ध कराये गये साक्ष्य कह रहे हैं। कहीं फर्जी अनुज्ञप्तिधारी को खाद्यान्न उपलब्ध करा कालाबाजारी की जा रही है तो कहीं अंत्योदय का फर्जी राशन कार्ड अपने व अपने परिजनों के नाम बनवा कर विक्रेता खाद्यान्न की कालाबाजारी कर रहा है।
यहां हम फिलहाल बात कर रहे हैं जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र अमांवा पंचायत के फर्जी विक्रेता योगेन्द्र पासवान का। आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी सूचना के आलोक में अनुज्ञप्ति फर्जी साबित होने के बावजूद जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई न किये जाने के बाद मामले का राज्य खाद्यान्न सचिव के पास ले जाया गया। उन्होंने डीएम को तीन सदस्यीय जांच कमिटी गठित कर जांच करने का निर्देश दिया।
जांच कमिटी ने डीएम को सौंपे प्रतिवेदन में योगेन्द्र पासवान की अनुज्ञप्ति को फर्जी करार दिया। नियमत: योगेंद्र पासवान के साथ इसके लिए दोषी अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए थी।लेकिन यह क्या? मामले को पुनः जुलाई तक के लिए जिला प्रशासन से लेकर राज्य खाद्यान्न सचिव ने टाल दिया। यानी कि फिलहाल तीन माह के लिए फिर कालाबाजारी की छूट दे दी गई।
ऐसे में आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल भला चुप कैसे बैठ जायेंगे इसलिए उन्होंने मुख्य सचिव से पूछा आखिर कार्रवाई कब? अब मुख्य सचिव के जबाव का इंतजार है ताकि फिर बचाने का प्रयास किया तो मामले को उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कराया जा सके क्योंकि सारे साक्ष्य विक्रेता से लेकर जिला व राज्य सरकार के विरुद्ध उपलब्ध है। वैसे फिलहाल देखा गया है कि गोविंदपुर व हिसुआ विधायक द्वारा गोविंदपुर व नरहट एसएफसी गोदाम जांच में भारी अनियमितता पाये जाने के बावजूद अबतक किसी के विरुद्ध न तो कार्रवाई सुनिश्चित हुई न ही किसी प्रकार का सुधार हो सका। ऐसा इसलिए कि हमाम में सभी हैं।
भईया जी की रिपोर्ट