नवादा : जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी और रजिस्ट्री के बाद होने वाले खूनी विवादों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार एक क्रांतिकारी व्यवस्था शुरू करने जा रही है। अब कोई भी जमीन खरीदने से पहले ग्राहक घर बैठे यह पता लगा सकेंगे कि उस प्लॉट पर कोई कानूनी झंझट या मालिकाना हक का विवाद तो नहीं है।
एनडीए सरकार की इस नई पहल से न केवल फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगेगी, बल्कि जमीन रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए महीनों दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी भी खत्म हो जाएगी। सरकार की यह पहल जमीन कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ खूनी जमीन विवादों और दलालों के खेल पर भी बड़ा प्रहार मानी जा रही है।
13 तरह की जानकारियों के साथ करना होगा ऑनलाइन आवेदन
नई डिजिटल व्यवस्था के तहत, जमीन का सौदा पक्का करने से पहले खरीदार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर एक ऑनलाइन आवेदन देना होगा। आवेदन में जमीन से जुड़े 13 महत्वपूर्ण बिंदुओं की सटीक जानकारी मांगी जाएगी। इसमें मुख्य रूप से जमीन का खाता, खेसरा, रकबा, वर्तमान जमाबंदीदार का नाम, जमीन पर कोई कोर्ट केस या लोन तो नहीं है, और जमीन सरकारी या गैर-मजरूआ श्रेणी की तो नहीं है, जैसे तथ्य शामिल होंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसके लिए खरीदार को भटकना नहीं पड़ेगा।
अंचल पदाधिकारी को 10 दिन के भीतर देनी होगी रिपोर्ट
आवेदन जमा होते ही संबंधित अंचल कार्यालय के लॉगिन में ट्रांसफर हो जाएगा। सरकार ने इसके लिए बेहद सख्त समय सीमा तय की है। अंचल पदाधिकारी (CO) और उनके राजस्व कर्मचारियों को आवेदन मिलने के ठीक 10 दिनों के भीतर जमीन की वास्तविक स्थिति और कागजी रिकॉर्ड्स की गहनता से जांच करनी होगी। जांच पूरी करने के बाद सीओ को ऑनलाइन अपनी स्पष्ट रिपोर्ट (क्लियरेंस सर्टिफिकेट) अपलोड करनी होगी। रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा होगा कि जमीन बेचने का दावा करने वाले व्यक्ति का मालिकाना हक पूरी तरह सही है या उसमें कोई गड़बड़ी है।
रैयती जमीन की कुंडली होगी खरीदार के सामने
बता दें कि बिहार में जमीन से जुड़े अपराधों का ग्राफ काफी ऊपर रहा है। प्राय: एक ही जमीन को दो अलग-अलग लोगों को बेच दिया जाता है, या भाइयों के आपसी विवाद के बीच ही फर्जी कागजात बनाकर जमीन की रजिस्ट्री कर दी जाती है। नई व्यवस्था के लागू होने से रैयती जमीन के निबंधन (रजिस्ट्री) से पहले ही खरीदार के पास उस जमीन की पूरी ‘कुंडली’ उपलब्ध होगी। यदि 10 दिनों की विभागीय जांच में जमीन पर कोई भी विवाद, पुराना मुकदमा या मालिकाना हक में कमी पाई जाती है, तो ग्राहक एडवांस पैसे देने या रजिस्ट्री कराने से बच जाएगा।
जमीन विवादों में आएगी भारी कमी, कोर्ट का घटेगा बोझ
राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने के बाद जमीन से जुड़े दीवानी और फौजदारी मुकदमों में स्वतः भारी कमी आ जाएगी। चूंकि सारी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, इसलिए बिचौलियों और दलालों का हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। सरकार इस सॉफ्टवेयर और नियम को अंतिम रूप दे रही है और जल्द ही इसे पूरे राज्य के सभी अंचलों में एक साथ लागू कर दिया जाएगा। इस कदम से बिहार में निवेश करने वाले और घर बनाने के लिए प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिकों को एक बड़ा सुरक्षा कवच मिलेगा।
भईया जी की रिपोर्ट