नवादा : जिले के स्वास्थ्य विभाग में तैनात संबंधित अधिकारियों व स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा जारी भ्रष्टाचार और एक बहुचर्चित निजी अस्पताल में कथित रूप से पांच रुपए में इलाज की घोषणाओं का सच उजागर करने के लिए पूर्व श्रम राज्यमंत्री राजबल्लभ प्रसाद ने पथरा इंग्लिश स्थित अपने आवास पर प्रेस सम्मेलन का आयोजन कर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। उपस्थित पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पांच रुपए में संपूर्ण इलाज का दावा करने वाले धर्मशीला देवी मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के संचालकों पर हैरतअंगेज आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने एफआईआर की कॉपी दिखाते हुए स्पष्ट किया कि इस अस्पताल में बड़े पैमाने पर आयुष्मान कार्ड की खरीद फरोख्त कर करोड़ों रुपए के सरकारी राजस्व की हेरा फेरी तो पूर्व से की जा रही है किंतु स्वास्थ्य बीमा के फर्जी दस्तावेजों पर करोड़ो रुपए का बीमा राशि हड़पने का नया खुलासा हुआ है।
उन्होंने आशंका जाहिर की है कि पांच रुपए में संपूर्ण इलाज का झांसा देकर आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग और स्वास्थ्य बीमा का हेर फेर बड़े पैमाने पर किया जा सकता है क्योंकि पूर्व में कई ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं। इस कार्य में सदर अस्पताल में तैनात कई स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं जो गंभीर जांच का विषय है। इस संदर्भ में मुफस्सिल थाना में सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है जिसका कांड संख्या 155/2026 दिनांक 7-5-2026 है। राजबल्लभ प्रसाद द्वारा प्रस्तुत एफआईआर कॉपी के अनुसार इस मुकदमे के सूचक जितेंद्र कुमार BOSM बजाज जेनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के कर्मी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध प्रक्रिया एवं फर्जी कागजातों के तहत बीमा कंपनी से स्वास्थ्य बीमा की राशि हड़प ली गई जो जांच का विषय है।
इस संदर्भ में दस्तावेजों के अनुसार शंभू कुमार, निशांत शर्मा, गौरव कुमार, रोहित कुमार, सिमरन कुमारी इत्यादि के नाम पर धर्मशीला देवी अस्पताल द्वारा करोड़ों रुपए बीमा राशि का दावा पेश किया गया जिसमें से अधिकतर राशि स्वीकृत कर ली गई और भुगतान भी लिया जा चुका है। अस्पताल के संचालक की सच्चाई सामने आने पर वहां के संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर जांच कार्य शुरू कर दी गई है। उन्होंने संबंधित जांच अधिकारियों समेत जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों से अनुरोध किया है कि धर्मशिला देवी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल केंदुआ के संचालकों के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच की जाय और तबतक तत्काल प्रभाव से अस्पताल को शील कर दिया जाय ताकि जनहित में कोई अन्य मरीज की जान जोखिम में न हो और समय रहते सरकारी राजस्व की क्षति को रोका जा सके।
भईया जी की रिपोर्ट