अरवल – मजदूर दिवस पर भाकपा माले कार्यालय से विभिन्न मार्ग होते हुए प्रखंड मुख्यालय गेट के समक्ष सभा का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता माले के वरिष्ठ नेता का. उपेंद्र पासवान ने की। सभा को संबोधित करते हुए अरवल के पूर्व विधायक महानंद सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया में 8 घंटे का काम मजदूर करते हैं और इसे कुर्बानी देकर प्राप्त किए। लेकिन भारत की मोदी सरकार के द्वारा चार लेबर कोड लाकर मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश रची गई है।
भारत में मजदूरों के लिए 44 लेबर कानून बना था जिससे उनके ऊपर कोई शोषण नहीं कर सके। जिसे मोदी सरकार के द्वारा खत्म करके श्रम संहिता लागू करना मजदूरों को गुलाम बनाना है। मजदूरों के अधिकार पर मोदी सरकार हथोड़ा चलाया है। मजदूर इससे गुलामी की जंजीरों में जीने को विवश होंगे। जबकि 8 घंटा काम, 8 घंटा आराम और 8 घंटे मनोरंजन के लिए 1886 में मजदूरों के आंदोलन के बल पर लागू हुआ था। कॉर्पोरेट घराने के फायदे के लिए मजदूर वर्ग ट्रेड यूनियन गठित नहीं करेंगे ऐसा कानून में प्रावधान लाया गया है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से मजदूर अपनी मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर दिल्ली के नोएडा में आंदोलन कर रहे थे। सरकार आंदोलनकारी पर लाठी डंडे और जेल में बंद कर मजदूरों के आंदोलन कुचलने का काम कर रही है। मजदूर के लिए आवाज उठाने वालों को आतंकवादी कहा जा रहा है। काम के घंटे कम करने व मजदूरी बढ़ाने के लिए आंदोलन कर रहे मजदूरों पर बर्बर दमन ढाया गया। मजदूरों के बदौलत ही देश की आर्थिक विकास होता है, लेकिन कारपोरेट परस्त मोदी सरकार मजदूरों को गुलाम बनाने पर तुली है।
उन्होंने कहा कि सरकार के इरान के साथ भारतीय परंपरा के विरुद्ध इजरायल के साथ खड़े होने के कारण महंगे गैस और गैस की कमी हो गई है, जिसका असर प्रवासी मजदूरों को लौटना पड़ रहा है। उन्हें भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के समय की तरह लौटने को विवश हो रहे हैं। सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव जितेंद्र यादव ने कहा कि मजदूरों को एकजुट होना होगा और संविधान व मजदूरों के अधिकार के हत्यारे मोदी के खिलाफ आवाज बुलंद करने होंगे। कार्यक्रम में सुएब आलम, नंद किशोर कुमार, महेंद्र प्रसाद, त्रिभुवन शर्मा , सुरेंद्र प्रसाद समेत कई नेता शामिल थे।
देवेंद्र कुमार की रिपोर्ट