भागलपुर स्थित सुल्तानगंज नगर परिषद में हुए खूनी शूटआउट का मास्टरमाइंड और ईओ हत्याकांड में मुख्य आरोपी रामधनी यादव को पुलिस ने आज तड़के एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया। सुल्तानगंज नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी का पति रामधनी यादव भागलपुर में दहशत का पर्याय बना हुआ था। उसके खौफ और दुस्साहस का आलम यह था कि एक बार वह एक शख्स का मर्डर करने के बाद उसका कटा हुआ सिर लेकर थाने पहुंच गया था। उसकी मौत के साथ ही भागलपुर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले एक खौफनाक अध्याय का अंत हो गया। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में दिनदहाड़े हुए हत्याकांड के महज 12 घंटे के भीतर पुलिस ने कुख्यात अपराधी और माफिया रामधनी यादव को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। आइए जानते हैं कि कौन था रामधनी यादव?
रामधनी का खौफ और सभापति से विवाद
रामधनी यादव इलाके के लिए महज एक नाम नहीं, बल्कि दहशत का पर्याय था। वह सुल्तानगंज नगर परिषद की उपसभापति नीलम देवी का पति था। लेकिन उसकी पहचान उसके जघन्य अपराधों और उसे अंजाम देने के तरीकों से ज्यादा थी। रामधनी के खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार वह एक व्यक्ति का कटा हुआ सिर हाथ में लेकर सीधे थाने पहुंच गया था। इस घटना के बाद से ही उसका नाम पूरे भागलपुर और आसपास के जिलों में गूंजने लगा था। वर्चस्व की लड़ाई और आपराधिक प्रवृति के कारण उस पर कई मुकदमे दर्ज थे। पुलिस का कहना है कि इस बार भी उसे उम्मीद थी कि वह पुलिस पर फायरिंग कर दहशत फैलाकर फरार हो जाएगा, लेकिन जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामधनी यादव का सुल्तानगंज नगर परिषद के सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू से लंबे समय से विवाद चल रहा था। मंगलवार को भी उसके लोग उसी को निशाना बनाने पहुंचे थे। लेकिन जब कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण कुमार ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
रंजिश और टेंडर विवाद ने लिया खूनी रूप
पुलिस सूत्रों के अनुसार नगर परिषद के टेंडरों को लेकर भी विवाद चल रहा था। रामधनी यादव चाहता था कि लाभदायक टेंडर उसके अनुसार बांटे जाएं। जबकि सभापति राजकुमार साह इसका विरोध कर रहे थे। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद गहरा गया और रामधनी ने राजकुमार साह को खत्म करने की योजना बनाई थी। पुलिस का यह भी कहना है कि रामधनी यादव और राजकुमार साह के बीच लंबे समय से दुश्मनी चली आ रही थी। फरवरी 2023 में रामधनी पर भी जानलेवा हमला हुआ था। दो शूटरों ने उसके घर के पास ही उस पर गोली चलाई थी, लेकिन वह बाल-बाल बच गया था। इस मामले में शामिल आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि रामधनी की हत्या के लिए 5 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी, जिसमें सभापति राजकुमार साह का नाम सामने आया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी पुरानी रंजिश और हालिया टेंडर विवाद के चलते मंगलवार को रामधनी यादव के लोगों ने सुल्तानगंज नगर परिषद में घुसकर राजकुमार साह पर जानलेवा हमला किया।
पुलिस ने रात 2:30 बजे किया ढेर
बताया जाता है कि ईओ हत्याकांड के बाद भागलपुर पुलिस की साख दांव पर लग गई थी। एसपी प्रमोद यादव के नेतृत्व में बनी टीम ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तुरंत रामधनी की पहचान की और उसे दबोच लिया। पुलिस उसे लेकर देर रात करीब 2:30 बजे हथियार बरामदगी के लिए जा रही थी, तभी रामधनी के साथियों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर रामधनी ने भी भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिसमें एक गोली रामधनी के पेट में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मुठभेड़ में डीएसपी नवीन और दो इंस्पेक्टर भी जख्मी हुए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, सारा विवाद नगर परिषद के टेंडर को लेकर था। बता दें कि मृतक ईओ कृष्णा भूषण की पत्नी उत्तर प्रदेश में एडीएम के पद पर तैनात हैं।