– अब तक 60 बच्चों को दत्तक ग्रहण के माध्यम से मिल चुका है नया परिवार
नवादा : समाहरणालय में एक भावुक पल देखने को मिला, जब जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश ने पश्चिम बंगाल से आये एक दंपती को सात माह की बालिका अनुजा (नया नाम- प्रिशा कर्मकार) को दत्तक ग्रहण पूर्व पोषण के लिए अस्थायी रूप से सुपुर्द किया। जिला दत्तक ग्रहण समिति की अनुशंसा पर इस कानूनी प्रक्रिया को विधिवत पूरा किया गया। दत्तक ग्रहण की यह प्रक्रिया भारत सरकार के केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) के ‘कैयरिंग्स’ पोर्टल के माध्यम से संपन्न हुई।
इसे दत्तक ग्रहण विनियम 2022 तथा किशोर न्याय अधिनियम 2015 के कड़े प्रावधानों के तहत पूरा किया गया। बच्ची को पाकर पश्चिम बंगाल के शिथुन कर्मकार और उनकी पत्नी अहेली मित्रा भावुक हो गये। उन्होंने कहा कि चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आज उनका परिवार पूरा हुआ है। जिला प्रशासन की पारदर्शी प्रक्रिया से न केवल अनाथ बच्चों को सुरक्षित भविष्य मिल रहा है, बल्कि नि:संतान दंपतियों के जीवन में भी खुशहाली आ रही है।
नवादा से अब तक 60 बच्चों को मिला घर
जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक रीतेश कुमार ने बताया कि नवादा का विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान बच्चों को नया जीवन देने में निरंतर सक्रिय है। अब तक यहां से कुल 60 बच्चों को परिवारों को सौंपा जा चुका है। इनमें से 14 बच्चों को अंतरदेशीय (विदेशी परिवारों को) और 46 बच्चों को देश के भीतर ही दत्तक ग्रहण के माध्यम से नया घर मिला है।
दत्तक ग्रहण के लिए पंजीकरण अनिवार्य
सहायक निदेशक ने जानकारी दी कि जो भी इच्छुक अभ्यर्थी बच्चा गोद लेना चाहते हैं, वे मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए कुछ अनिवार्य दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इनमें मुख्य रूप से पैन कार्ड, पहचान प्रमाण (जैसे सरकारी आइडी), विवाह प्रमाणपत्र, चिकित्सा प्रमाणपत्र, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, आय प्रमाणपत्र शामिल है।
भईया जी की रिपोर्ट