अरवल -भाकपा माले जिला कार्यालय से बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर आज मजदूर को गुलाम बनाने वाली नीतियों व कानून लागू करने वाली भाजपा सरकार के खिलाफ गरीब एकजुटता मार्च निकाला गया इस दौरान बाबा साहेब की मूर्ति के पास माल्यार्पण के उपरांत सभा की गई। इसके बाद स्वतंत्रता सेनानी पार्क पर बना संविधान के प्रस्तावना, अशोक स्तम्ब पर माल्यार्पण किया गया। जुलूस में भारी संख्या में मजदूर, महिला एवं छात्र युवा शामिल हुए। गरीब एकजुटता मार्च भाकपा माले कार्यालय से निकला जो मुख्य मार्ग होते हुए नगर थाना से होते हुए प्रखंड परिसर स्थापित बाबा साहेब की मूर्ति के पास पहुंचा जहां माल्यार्पण के बाद सभा की गई। मार्च का नेतृत्व भाकपा माले राज्य स्थाई समिति सदस्य व अरवल के पूर्व विधायक महानन्द सिंह, उपेंद्र पासवान, महेंद्र प्रसाद, जिला पार्षद शाह शाद, रमाकांत उर्फ टुन्ना शर्मा, नंद किशोर कुमार, लीला वर्मा, राम कुमार सिन्हा समेत कई नेता कर रहे थे। सभा की अध्यक्षता भाकपा माले के वरिष्ठ नेता उपेंद्र पासवान ने की।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले राज्य स्थाई कमेटी सदस्य एवं अरवल के पूर्व विधायक महानंद सिंह ने कहा कि आज बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाने का मतलब है, कि भाजपा सरकार द्वारा मजदूरों को गुलाम बनाने वाले चार लेबर कोड कानून के खिलाफ लड़ना। जातीय भेदभाव के तहत आज भी यूनिवर्सिटी और उच्च शिक्षण संस्थानों में एस सी एस टी ओबीसी, अति पिछड़ा को जातीय, धर्म, लिंग, क्षेत्र विकलांगता के आधार पर प्रताड़ित किए जाने के खिलाफ कड़े कानून बनाने के लिए संघर्ष करना। उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती मनाने का मतलब है की संविधान पर हो रहे लगातार हमले के खिलाफ व्यापक गरीबों को एकजुट होकर प्रतिवाद करना। अंधविश्वास के खिलाफ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को स्थापित करना होगा।
दलितों/गरीबों के घरों पर चलाए जा रहे बुलडोजर का प्रतिवाद करना आज बाबा साहेब अंबेडकर को याद करने का मतलब होगा। संवैधानिक अधिकार पर हमला करने वाली भाजपा सरकार के हरेक मुहिम के खिलाफ व्यापक गरीबों को संगठित होना होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा जब से आई है गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाना शुरु कर दिया है। छुआछूत, जातीय भेदभाव, महिलाओं के ऊपर बढ़ते हिंसा, दलितों पर मनुवादियों द्वारा किए जा रहे हमले में काफी बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं भाजपा के अनुसांगी संगठनों द्वारा बाबासाहेब अंबेडकर की मूर्ति को तोड़ने का काम करते हैं, कालिख पोतने का काम करते हैं और माला पहनाकर उनके अनुयायियों के आंखों में धूल झोंकने का भी बड़ी चालाकी से काम करते है।
बाबा साहेब अंबेडकर अप्रैल माह में जन्म लिए जो एक चमत्कार के रूप में सामने आए। लेकिन इसी अप्रैल माह में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले योद्धाओं को जलियांवाला बाग जैसे कांड झेलना पड़ा। लेकिन विडंबना रही है कि आजाद हिंदुस्तान में इसी अप्रैल महीना 19 अप्रैल 1986 को गरीबों को दूसरा जलियांवाला बाग कांड झेलना झेलना पड़ा। संविधान प्रदत्त अधिकार हासिल करने के लिए गरीबों को बाथे, शंकर विगहा समेत अन्य जनसंहार का भी दंश झेलना पड़ा और बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी है। धर्म के नाम पर गरीबों के अंदर उन्माद पैदा करवाया जा रहा हैं। सभा को शाह शाद, टूना शर्मा, लीला वर्मा, युवा नेता नीतीश कुमार, रामकुमार वर्मा समेत कई नेताओं ने भी संबोधित किया।
देवेंद्र कुमार की रिपोर्ट